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Category: Short Stories

कुंवारा बाप

चारो और जश्न का शोर था हर कोई अपने अपने कामो में लगा था , मैं पंडाल की लाइट लगवा रहा था कि तभी किसी ने पीछे से आकर मेरे कंधे पर हाथ रखामैंने पलट कर देखा , अरे रमेश तुम , यहाँ कब आये“आ तो काफी दिन पहले गया था मगर तुमसे बिना मिले वापिस जा न सका ..कैसे हो तुम ” , रमेश ने राघव की ओर मुस्कुराते...

परिवर्तन

चारो तरफ जश्न का शोर था। और मैं अपने एक अलग ही खुशी के खुमार में थी।मेरी बेटी को अपनी पहली फिल्म जो मिली थी।मेरी बेटी रावी एक बाल कलाकार थी। ४ साल की रावी दिखने में बहुत खूबसूरत और प्यारी थी।मुझे आज भी याद है की मैंने कैसे कैसे हाथ-पैर मारकर उसे वो २-३ Ads दिलवाये थे। आज पुरे २ साल बाद जब वो ६ साल की हो गई...

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