Pearl In Deep
Passion to write

तेरे जैसा प्यार कहाँ part – 5

कुछ दिनों तक रोज यही सब चलता रहा….इन्दर आन्या को सताने की , उसे परेशान करने की नाकाम कोशिश कर रहा था पर आन्या भी मन की बहुत पक्की थी। उसे बहुत ज्यादा तकलीफ और बैचनी हो रही थी पर वो फिर भी शांत बनी हुई थी।
उधर इन्दर की बैचनी भी कुछ कम नहीं थी। और ऊपर से
आन्या पर फर्क न पड़ते देख इन्दर की घबराहट और डर भी बढ़ रहा था। उसे डर था कि कही पहले आप , पहले आप के चक्कर में गाड़ी ही न छूट जाये।

मगर सच ही कहा है किसी ने की अगर किसी के साथ आपकी किस्मत ही जुडी हो तो वो लौटके आपके पास ही आएगा….और उसे आपसे मिलने से कोई नहीं रोक सकता……. अब तो इन दो दिलो की जिन्दगियो का फैसला भी फिलहाल वक़्त पर ही छूट गया था …..

********

मनाली की खूबसूरत शाम ,
आन्या अपनी बालकनी में बैठी चाय पी रही है। हल्की हल्की ठंडी हवा चल रही है। काफी दिनों से आन्या अपने घर को बहुत मिस कर रही थी , अचानक वो अपने बचपन की यादों में खो जाती है।

“माँ , मुझे बर्फ देखनी है। वो कितनी सफ़ेद होती होगी ना , बहुत कोमल, रुई जैसी नरम, हैं ना माँ ”, छोटी नन्ही आन्या ने अपनी प्यारी प्यारी आँखें चमकाते हुए अपनी माँ से चहककर पूछा।

“हम्म , बहुत नरम बिलकुल मेरी इस राजकुमारी के गालो की तरह” ….माँ ने आन्या के प्यारे मुलायम गालो को हलके से खींचते हुए कहा और हंस पड़ी…. वैसे अचानक से ये सब क्यों याद आ गया तुझे हम्म,  माँ ने पूछा तो आन्या भोला सा मुँह बनाकर बोली , ” आज टीवी में देखा मैंने , मुझे भी देखनी है माँ ….”, आन्या ने कहा तो माँ बोली , “अच्छा बाबा देख लेना। पहले बड़ी तो हो जा……तेरे लिए वही से एक दूल्हा ढूढ़ लाऊंगी गोरा चिट्टा, फिर हमारी आन्या हमेशा वही रहेगी मुलायम और नरम बर्फ के गद्दों पर। ठीक है न ?”, आन्या की माँ उसके भोलेपन पर मुस्कुराकर बोली।

“सच माँ क्या ऐसा भी गद्दा होता है क्या ?” आन्या ने भोलेपन से  पूछा तो माँ हँसते हुए बोली “अरे मेरी पगली चाँद की टुकड़ी,  मैं तो मजाक कर रही हूँ। तू भी ना सच्ची कितनी भोली है। “ कहकर माँ उसके गाल चूम लेती है…

आन्या के मन में अपनी माँ की गुदगुदाती याद और हंसी अभी तक गूँज रही थी।
“मैं भी सच्ची कितनी बुद्धू थी। “, आन्या सोच कर हंस देती है।

अब तक , हल्का अँधेरा हो गया था और आस पास का कुछ साफ़ नजर नहीं आ रहा था। आन्या की मौसी ने खाने के लिए आवाज लगायी।, ” आती हूँ मौसी “, आन्या ने जवाब दिया और नीचे जाने के लिए मुड़ी, तभी उसे लगा कि घर के पास के पेड़ो के पास कोई है जो उसे देख रहा है।

आन्या ने थोड़ा ध्यान से देखने की कोशिश की तो वो आकृति अँधेरे में ओझल हो गई ….. मानों उसे एहसास हो गया हो कि आन्या उसे देख चुकी है। आन्या काफी देर तक देखती रहती हैं मगर ना तो उसे कोई दिखाई देता और ना ही फिर कोई हलचल होती……आन्या इसे अपना भ्रम समझ कर वहाँ से चली जाती है।
उसके जाते ही वो साया फिर से पेड़ो के पास दिखाई देता हैं…..जरा देर खड़ा रहकर फिर गायब हो जाता हैं …

*****

खाने की मेज पर –
आन्या की मौसी , मौसाजी और उनका प्यारा बेटा ध्रुव बैठा है। तभी आन्या भी आ जाती है।
आन्या तुम अपनी प्लेट लगा लो , मैंने नार्थ इंडियन और साउथ इंडियन दोनों फ़ूड बनाये है एक ध्रुव की पसंद और एक तुम्हारे मौसा जी की…. तुमको जो भी खाना हो खुद ही ले लो…
ध्रुव – दीदी , आप इडली खाओ ना यम्मी बनी है …मुझे बहुत पसंद है
आन्या हसते हुए- अच्छा जी , फिर तो आज हम इडली ही खाएंगे अपने छोटे भाई के साथ …ओके ठीक
ध्रुव – आप कितनी अच्छी हो दीदी
आन्या ध्रुव का सर सेहलाके  – हाँ, क्योकि मेरा ध्रुव , इतना अच्छा है इसीलिए मैं  भी अच्छी हूँ ..
मौसी – तुम दोनों ऐसे बाते करते हो तो मुझे देखकर बड़ा प्यार आता है और दिल को सुकून भी मिलता है … आन्या , ध्रुव तुमको बहुत प्यार करता है… तुम्हारे साथ उसे कभी दोस्त की कमी नहीं अखरती .. थैंक यू बेटा….
आन्या – थैंक्स मत कहो ना मौसी… वैसे ध्रुव की आप चिंता मत किया करो जब तक मैं यहाँ हूँ तब तक तो बिलकुल भी नहीं ….
मौसी हसकर – ओके
मौसाजी – अब तुम भी प्लेट लगा लो श्रद्धा , पूरा दिन कैफे फिर घर… थोड़ा खुद  का भी ध्यान रखा  करो… मैं किस-किस का ध्यान रखू…हम्म
मौसी – आप तो बस रहने ही दो… मेरा ध्यान रखेंगे …उल्टा मुझे ही २- २ बच्चो का ध्यान रखना पड़ रहा है …
मौसाजी (मुँह बनाके ) – अरे यार कम से कम आन्या के आगे तो ….
सुनकर आन्या हंस पड़ती है …
वो लोग खाना लेते है और फिर अपने अपने कमरों में चले जाते है।
अपने कमरे में पहुंच कर आन्या को याद आता है कि कुछ देर पहले नीचे कोई था , वो एक बार फिर से झाँक कर देखती है पर कोई नहीं दिखाई देता। फिर वो परदे डाल कर सोने लेट जाती है।
अगले दिन, आन्या थोड़ा देर से उठती है। उसे हल्का बुखार है। यहाँ का हर दिन बदलता मौसम उसे काफी परेशान कर रहा है..मौसी उसे घर पर ही आराम करने को कहती है। क्योकि उसे कल मंदिर भी जाना हैं …..तो इतना घूमना उसके लिए ठीक नहीं….ये कहकर मौसी उसे कैफे के लिए मना कर देती हैं…..
मगर आन्या कैफे जाना चाहती थी क्योकि उसे वहाँ इन्दर के आने का इंतजार है। पर मौसी के बार बार कहने पर वो मन मार कर घर पर ही रुक जाती है।

उधर कैफे पर ठीक उसी टाइम पर इन्दर आता है पर उसे आन्या वहाँ दिखाई नहीं पड़ती।
वो अपनी निगाहे चारो और दौड़ाता है फिर भी आन्या नहीं दिखाई पड़ती।
कुछ सोचकर वो थोड़ा परेशान और बैचैन होने लगता है और फिर आलिया से बोलता है…
“आलिया , प्लीज मौसी से पता करो ना आन्या कहाँ है। वो आज आई क्यों नहीं? ”, इन्दर ने आलिया से विनती करते हुए कहा।
“इन्दर मुझे समझ नहीं आता तुम चाहते क्या हो , उससे बात भी नहीं कर रहे और उसके बारे में पता करने के लिए भी बोल रहे हो। मैं नहीं जाउंगी अब पूछने, तुम खुद पता करो। तुम ही ने तो उसको परेशान किया इतना , अब क्यों पछता रहे हो ….“, आलिया ने इन्दर को आन्या के लिए टीस करते हुए कहा।

“ओके ठीक है मत करो पता , तुम इतने ही अच्छे दोस्त हो मेरे , देख लिया आज “, इन्दर थोड़ा गुस्से से , इमोशनल ब्लैकमेल करते हुए बोला….

“अरे ! आलिया सही तो बोल रही है , तुम उससे खुद बात क्यों नहीं कर लेते। अगर तुम सोच रहे हो कि आन्या आकर तुमसे बात करेगी तो तुम गलत हो। वो नहीं आएगी। ये मैं इसीलिए बोल रहा हूँ क्योकि अगर पहल की बात आती हैं तो ऑब्वियस्ली वो तुम ही तो करोगे …..वो तो वैसे ही इतनी शर्मीली है…..और रही बात जिद की तो वो तो तुम दोनों ही जिद्दी हो…तो अब देख लो तुमको क्या करना हैं….“, रवि ने अपने दोस्त को सुझाव देते हुए कहा।

इन्दर – आना तो उसको पड़ेगा ही… कैसे भी ….

“कही ऐसा न हो के तुम यहाँ सोचते ही रह जाओ और आन्या यहाँ से वापिस ही चली जाये। तुम भूल रहे हो कि ये उसकी मौसी का कैफे है वो यहाँ सिर्फ आई हुई है। तुमको तो ये भी नहीं पता कि वो रहती कहाँ है और करती क्या है। “, इस बार मीता रवि की बात आगे पूरी करते हुए बोलती है।

इन्दर आन्या के वपिस जाने वाली बात सुनकर घबरा जाता है और उठकर वहाँ से काउंटर की तरफ जाने लगता है।
“कहा चल दिए अब …… “, रवि मुस्कुराते हुए पीछे से चिल्लाया तो इन्दर पलट कर बोला,  “जहन्नुम….. ” , इस  पर रवि हँसते  हुए , “ओके , मतलब आ गया समझ अब….”

काउंटर पर पहुंचकर इन्दर मौसी के सामने खड़ा हो जाता है …. “जी कहिये ….”, ये कहकर आन्या की मौसी इन्दर की ओर  देखती है।
“अरे आप इन्दर राजवंशी है न ?”, मौसी इन्दर को देखकर उत्सुक होकर पूछती है।
“जी हाँ !”, आप मुझे कैसे जानती है।
“अरे आपको कौन नहीं जनता। वैसे आपको कुछ चाहिए ?”, आन्या की मौसी इन्दर को टटोलते हुए पूछती है।

“जी हाँ – जी नहीं – जी वो “, इन्दर थोड़ा हड़बड़ा जाता है।

मौसी – “जी बोलिये ….. कोई और इशू? क्या वेटर से कुछ गलती हुई ?”

इन्दर – “जी, जी… नहीं नहीं , आप गलत समझ रही है। मैं आपसे कुछ पूछना चाहता था। “

मौसी –हाँ जी, बिलकुल पूछिए?

इन्दर को कुछ समझ नहीं आता कि कैसे और क्या पूछे। वो कुछ नहीं कह पा रहा था बस मुस्कुराया और “जी कुछ नहीं, बस यू ही….”, ये कहा और वापिस जाने के लिए मुड़ता है।

मौसी (धीरे से )– वैसे…., आन्या घर पर आराम कर रही है उसे बुखार है। (मौसी मुस्कुराकर एक साँस में ही पूरी बात बोल देती है। )

इन्दर आश्चर्य से वापिस पलटता है। मौसी को देखता है वो धीमे धीमे मुस्कुरा रही है…
इन्दर – जी आप , वो , मैं

मौसी – देखिये मैं इन सब बातो से अनजान नहीं हूँ। मुझे सब समझ आता है। चुकीं मैं आपको अच्छे से जानती हूँ इसीलिए अब तक शांत रही….
देखो इन्दर , आन्या एक बहुत ही सीधी और सुलझी हुई लड़की है। मुझे नहीं पता आपके मन में क्या चल रहा हैं,  जो भी हो , पर फिर भी मैं बस इतना ही कहूँगी कि उसका नन्हा सा कोमल दिल कभी मत दुखाना। बाकि आप लोग खुद समझदार हो।

इन्दर (मौसी की बातें सुनकर )- जी मौसी , पर क्या आप मेरी मदद करेंगी? मुझे ये जानने में कि आन्या मेरे बारे में क्या सोचती है।

देखिये पहल आपकी अपनी खुद की हो , तभी इन भावनाओ के सच्चे मायने होंगे। मौसी ने कहा…. और ये आन्या को भी शायद पसंद ना आये…

इन्दर कुछ सोचकर – वो मुझे कहाँ मिल सकती है ?

मौसी – कल हडिम्बा देवी मंदिर पर जाएगी वो। वहाँ…..

इन्दर मौसी की बात सुनकर “थैंक यू मौसी ” कहकर वहाँ से चला जाता है।

*****

अगले दिन –

मंदिर की पार्किंग में एक टैक्सी आकर रूकती हैं और अंदर से आन्या उतरकर मंदिर की और जाने लगती है….
मंदिर के बाहर ही इन्दर उसका इन्तजार कर रहा था। उसकी निगाहे आन्या पर पड़ती है , आन्या ने आज सफ़ेद सूट लाल दुपट्टे के साथ पहना हुआ था जिसमें वो बहुत ही प्यारी लग रही थी …..तभी तेज हवा का झोका आता है और आन्या के चेहरे पर उसके बालो की लटें बिखर जाती है।
कुछ पल इन्दर उसे अपलक निहारता रहता है….

“ए खुदा तूने ये कयामत दिखाई न होती।
उनके चेहरे पर जुल्फ गिराई न होती।।
होश कहाँ अब इस आशिक को है।
काश ! ये मुहोब्बत जैसी चीज बनाई न होती।। “




तभी इन्दर के कंधे पर पीछे से कोई हाथ रखता है , इन्दर एकदम से पलट कर देखता है तो वो उसका दोस्त रवि होता है।
रवि – “मिली ?”
इन्दर – “हाँ वो –“
इन्दर वापिस पलटकर देखता है पर तब तक आन्या नजरो से ओझल हो जाती है।
इन्दर – अरे अभी तो यही थी , कहाँ गई।

“तेरी एंट्री ना हमेशा गलत टाइम पर होती हैं , अब कहाँ ढूँढू उसे इतनी भीड़ में।”, इन्दर रवि पर गुस्सा करते हुए बोला।

“अरे गुस्सा मत हो भाई ,,,,,भाभी जी को हम ढूढ़ लेंगे। जाओ इत्ते तुम दर्शन तो कर आओ …. “, रवि ने मुस्कुराकर इन्दर को छेड़ते हुए कहा…..

इन्दर – “साले, तेरी तो , अभी बताता हूँ रुक। “
(इन्दर रवि के पीछे भागता है , तभी उसकी टक्कर आन्या से हो जाती है। )

आन्या के हाथ से सामान छूट कर नीचे गिर जाता है और इन्दर गिरती हुई आन्या को बाहों में संभाल लेता है।
थोड़ी देर के लिए दोनों की निगाहे एक दूसरे से मिलती है और वो एक दूसरे को देखते रह जाते है।
दोनों में से किसी ने भी इससे पहले एक दूसरे की इतनी नजदीकियों का एहसास नहीं किया था। एक तो वो वैसे ही इतने दिन से बात नहीं कर रहे थे तो एक दूसरे को इतना करीब पाकर दोनों एक पल के लिए एक दूसरे में खो से जाते है।

बैकग्राउंड  म्यूजिक….
“चलने लगी है हवाएं , सागर भी लहराए—–“

तभी पीछे से रवि मुस्कुराते हुए आया , “नमस्ते भाभी जी “
यह सुनकर इन्दर एकदम से हड़बड़ा जाता है और फिर से आन्या को सड़क पर छोड़ देता है।
सब हसने लगते है।

इन्दर और आन्या दोनों झेप जाते है। सॉरी आन्या वो गलती से…कहकर इन्दर आन्या को उठाता है और दोनों नीचे बैठ कर सामान उठाने लगते है।

इन्दर (अनजान बनते हुए ) – आप यहाँ ?

आन्या – हाँ वो मंदिर आई थी — आप यहाँ कैसे ?

इन्दर – जी मैं भी ,,,,,,,, आता रहता हूँ,,,, ,,,, (हसकर झूट छुपाते हुए ),,,,,,कभी कभी

आन्या – ओह अच्छा , आपके दर्शन हो गए ?

इन्दर – नहीं — हाँ — मतलब हो गए (मन ही मन – आपके दर्शन तो कबके हो गए। )

रवि – आश्चर्य से , कब किये तूने ?
इन्दर उसे कोहनी मारता है और मुस्कुराने लगता है —अरे अभी तो किये थे रवि, इतनी जल्दी भूल गया ।

रवि – अरे हाँ , अच्छा अच्छा वो न मैं भूल गया था।

आन्या – (सामान उठा कर ) अच्छा मैं चलती हूँ।

इन्दर – जी

रवि इन्दर को कोहनी मारता है – अबे रोक !

इन्दर – (हड़बड़ाकर ) सुनिए आन्या जी

आन्या – जी

इन्दर – क्या आप मेरे साथ एक कॉफी पीना पसंद करेंगी?

आन्या- (थोड़ा सोच कर ) ठीक है

दोनों पास ही एक कॉफ़ी शॉप में कॉफी पीने के लिए घुसते है। दोनों के ही दिल की धड़कने बहुत तेज है।
दोनों ही बात करना चाहते है पर समझ नहीं आ रहा क्या बात करे।

इन्दर कॉफी का आर्डर करता है।

इन्दर वेटर से – “२ कैपेचीनो प्लीज –“

आन्या नजरें झुकाये बैठी है।

इन्दर – आप कहाँ से है आन्या ?

आन्या – जी वो मोहाली से।

इन्दर – अरे वाह मैं भी तो उधर की साइड से ही हूँ – चंडीगढ़…..
वैसे आपके घर में कौन कौन है?

आन्या – माँ , बाउजी , काका , काकी , दादी , २ भाई और एक बहिन

इन्दर – काफी बड़ी फॅमिली है आपकी , आपको तो बहुत अच्छा लगता होगा वहाँ।

आन्या (उत्त्साहित होकर ) – हाँ , हम सब पूरा दिन इतना मस्ती करते है , मेरे घर में सभी बहुत अच्छे है। मैं तो लाड़ली हूँ सबकी और मेरा छोटा भाई तो बिलकुल मेरे लिए बेटे जैसा है। और और अर्थ से तो मैं ऐसे लड़ती हूँ जैसे चूहा और बिल्ली…..आन्या ने हसते हुए कहा….हमारी तो पूरा  दिन बजती है….

अर्थ भाई है आपका, इन्दर ने उत्साहित होकर पूछा….तो आन्या मुस्कुराकर बोली,  हाँ मेरा चाचा का बेटा हैं….
आन्या अपने घर के बारे में इन्दर को बताये जा रही थी और इन्दर आन्या के चेहरे की खुशी को एक टक निहारे जा रहा था।

तभी कॉफी आ जाती है और दोनों कॉफी पीने लगते है।
आन्या अब इन्दर के साथ काफी सहज महसूस कर रही थी।

इन्दर – अच्छा तो लाडली है आप , तभी आप भी काफी जिद्दी है।
आन्या – (मुस्कुरा कर ) आप भी तो

इन्दर – आप आई ही नहीं मुझे देखने

आन्या – (बात बदलते हुए ) अभी कैसे है आप?

इन्दर – हंसकर , अब तो ठीक ही हूँ।

फिर दोनों हसने लगते है।

आन्या – अच्छा अब मैं चलती हूँ। बहुत देर हो रही है।

इन्दर – क्या मैं आपको छोड़ दू ?

आन्या – नहीं मैं टैक्सी कर लूँगी।

इन्दर – शाम को अकेले जाना क्या सही रहेगा ?

आन्या – (हसते हुए ) ठीक है आप छोड़ दीजिये।

फिर दोनों जीप में बैठ जाते है और इन्दर आन्या के घर की तरफ जीप मोड़ देता है। आन्या चुपचाप सी , शरमाई सी , सकुचाई सी बैठी थी। रेडियो पर गाने चल रहे थे….आन्या लगातार बाहर की तरफ देख रही थी मगर उसके बाल हवा के कारण उसके चेहरे पर आ जा रहे थे…..और इधर इन्दर जीप चलाते चलाते शीशे में उसकी लटाओं को निहार रहा था….

आन्या की निगाह इन्दर पर पड़ती है। खुद को इन्दर द्वारा शीशे में देखते हुए आन्या थोड़ा झेप जाती है।

इन्दर (बात को सामान्य करते हुए ) – तो क्या अब हम दोस्त है?

आन्या मुस्कुराते हुए – सोच कर बताउंगी।

ठीक है , मैं इन्तजार करूँगा ,,,,,,,, दोनों फिर हंस देते है।

(घर पहुंच कर )
आन्या – थैंक यू —

इन्दर मुस्कुरा कर – थैंक यू रहने दीजिये वैसे भी हम दोस्त होने वाले हैं , हैं ना ?
सुनकर आन्या मुस्कुराई…. बाई…. अब जाओ….

ओके बाय सी यू — कहकर इन्दर वहाँ से चला जाता है।

आन्या बातें सोच कर मुस्कुराते हुए घर के गेट में घुसती हैं तभी उसे फिर महसूस होता है कि कोई झाड़ियों के पास से उसे देख रहा है। वो पलट कर देखती है पर उसे कुछ नजर नहीं आता।
आन्या अंदर चली जाती है।

क्रमशः

वो साया कौन है जो बार बार आन्या को अपने घर के पास महसूस होता है?
कौन है जो उसको छुप छुप कर देखता है?


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धन्यवाद
रूचि जैन

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