Pearl In Deep
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तेरे जैसा प्यार कहाँ part – 36

आन्या का घर, मोहाली

“ये आर्डर तो हमें चाहिए ही चाहिए, कैसे भी,,,,, तुम बात करो उन लोगो से,,,, जितने पर भी बात बने…. आर्डर उठा लो और डील क्लोज कर दो….”, पुरुषोत्तम जी ने घर के गेट में घुसते घुसते आन्या के काका उत्तम जी से कहा जो कि तेज चाल से पुरुषोत्तम जी के साथ ही चल रहे थे….
“ठीक है भाई साहब, मैं कल ही मीटिंग फिक्स कर लेता  हूँ …”, उत्तम जी ने जवाब दिया तो पुरुषोत्तम जी मुस्कुराते हुए , सोफे पर बैठते हुए बोले, “और हाँ….बाकि अर्थ तो आ ही जायेगा कल, फिर ये आर्डर उसको पकड़ा  देना, वो अब अच्छे से इसे संभाल सकता है…”

“मगर भाई साहब, अर्थ अभी नहीं आया हैं…., सुनैना बोल रही थी कि कुछ दिन वो और रुकेगा वहां…”, कहकर उत्तम जी भी सामने वाले सोफे पर बैठ गए…
तभी सुनैना पानी ले आई और उसने दोनों को पानी पिलाया…
“अर्थ नहीं आया? उसे तो आज आना था ना….”, पुरुषोत्तम जी ने सुनैना की और देखते हुए कहा तो सुनैना बोली, “भाई साहब , वो दीदी की बात हुई थी उससे, वो रुकना चाहता है थोड़े दिन , बच्चे है घूमने का मन तो कर ही जाता है…बाकि आप जैसा कहेंगे….” , सुनैना ने मुस्कुराते हुए, थोड़ा झिझक के साथ अर्थ का पक्ष रखा…..तो पुरुषोत्तम जी हंस पड़े…फिर मुस्कुराते हुए बोले, “हाँ,  हाँ कोई बात नहीं , बच्चे ही तो है…कोई नहीं घूमने दो… फिर तो आगे हमारे जैसे ही उलझ जाना है बिज़नेस में….”, यह सुनकर सुनैना ने तो जैसे चैन की सांस ली हो , “कितने अच्छे है भाई साहब , और मैं तो बेकार ही डर रही थी….ये अर्थ भी ना… हर बार हमे फसा देता हैं ….”, यह सोचकर सुनैना मन ही मन मुस्कुराई….
तभी वहां दादी और साध्वी जी भी आ गई… उन लोगो ने भी शायद सारी बातें सुन ली थी…. साध्वी जी ने चाय की ट्रे को मेज पर रख दिया और फिर साध्वी और सुनैना दोनों ही सबको चाय देने लगी…

“जी मैं आपको बताने ही वाली थी, कल देर रात बात हुई थी उससे तो बता नहीं पाई थी आपको और आज सुबह आप जल्दी निकल गए थे ….”, साध्वी ने चाय का कप पुरुषोत्तम जी को पकड़ाते हुए कहा तो दादी मुस्कुराते हुए बोली… “कोई बात नहीं  बहु…मुझे तो बता दिया था ना तुमने… बस…तो फिर अब तो पुरुषोत्तम को भी कोई नाराजगी नहीं होगी….क्यों पुरुषोत्तम?”
दादी की बात सुनकर पुरुषोत्तम जी हंस पड़े और चाय का सिप लेकर मुस्कुराते हुए बोले…”माँ , अच्छी बनी है चाय,  आज आपने बनाई है ना  ?… कितने सालो बाद पी आपके हाथ की चाय…..वैसे आपके होते मुझे किस बात की नाराजगी..”, यह सुनकर दादी भी मुस्कुरा पड़ी…
“हाँ , आज माँ को पता नहीं क्या जिद चढ़ी, बोली मैं ही बनाउंगी चाय… मगर आपने कैसे पहचान लिया बिना कुछ बताये…”, साध्वी जी ने आश्चर्य से पूछा तो पुरुषोत्तम जी मुस्कुराते हुए दादी की तरफ देखने लगे, फिर चाय का कप रखा और दादी की हथेलियों को पकड़कर बोले,,, “इन हाथो ने संभाला है हमको बाबूजी के बाद,,, कितने छोटे थे हम,,,,, मगर कुछ नहीं भूले है ,,,,, माँ के प्यार की , उनकी तपस्या की खुशबू आज भी बसती हैं हमारे दिल में….उनके हाथो की छुअन तो हम आँख बंद करके भी पहचान ले…”, बोलते बोलते पुरुषोत्तम जी की आँखों में नमी आ चुकी थी जिसे देख बाकि सब भी भावविभोर हो गए….
अब तक उत्तम जी भी उठकर दादी के पास ही आ गए थे और अपना सर उनके कंधे पर टिका दिया…
दादी ने पुरुषोत्तम जी और उत्तम जी दोनों के सर पर हाथ रखते हुए कहा , “खूब तरक्की करो मेरे बच्चो…और सदा खुश रहो…मेरी तपस्या का फल आज ये मेरा पूरा परिवार हैं ना”, कहकर दादी की आँखें भी गीली हो गई….
कुछ पल के लिए पूरा माहौल भावुक हो गया था…
“माँ , मगर फिर भी आप इस उम्र में रसोई में मत लगा कीजिये “, उत्तम जी ने माहौल को वापिस से सामान्य बनाते हुए कहा तो पुरुषोत्तम जी भी बोल पड़े , “हाँ , माँ उत्तम सही कह रहा हैं…”
तो दादी हंस पड़ी और बोली , “अरे कहाँ लगती हूँ,,, ये दोनों कुछ करने ही नहीं देती… पर जब कभी बहुत मन होता है तो बस….खैर अब ये सब छोड़ो और चाय पी लो…. देखो तो सब ठंडी भी हो गई… “
इस पर सब हसने लगे और पुरुषोत्तम जी भी हसते हुए बोले , “कोई नहीं माँ , आज ठंडी ही सही….”

*****

मनाली

शाम के ५ बजे थे,,,, इन्दर और आन्या के बीच के काफी मनमुटाव सुलझ चुके थे …. मौसी के भी वापिस आने का टाइम हो चुका था…. दोनों मौसी और अर्थ का ही इन्तजार कर रहे थे, मगर इंस्पेक्टर के आने की बात ने दोनों को ही बेचैन किया हुआ था…
“आन्या, वो नया इंस्पेक्टर  विक्रम आज स्पेशली तुमसे मिलने आ रहा है , इसका मतलब समझती हो तुम ?, मतलब उसको तुम्हारे पुराने स्टेटमेंट पर संदेह है , यानि उसको ऐसा शक हो चुका है कि तुमने उनसे कुछ ना कुछ तो छुपाया है…. “, इन्दर ने कुछ सोचते हुए आन्या की और देखते हुए कहा तो आन्या थोड़ा घबरा गई और इन्दर  से बोली,  “फिर अब…..अब क्या करना है? , मानव के बारे में बता दूँ क्या उनको? “, आन्या काफी घबराई हुई थी… ये सब पुलिस , केस आदि उसने पहले कभी नहीं झेले थे…
उसको इतना घबराया हुआ देखकर इन्दर थोड़ा परेशान हो गया उसने उसके हाथो को अपने हाथो में थाम लिया और उस पर थपथपाता हुआ बोला, “देखो आन्या अगर इंस्पेक्टर  के आगे इतना घबराओगी तो उसे कोई शक नहीं भी हो तो भी हो जायेगा…. तुमको बहुत समझदारी से काम लेना होगा….वैसे भी मैंने सुना है कि वो इंस्पेक्टर कुछ अलग ही है…इसीलिए बेहतर तो यही होगा कि हमारा उससे कम से कम सामना हो…”

यह कहकर इन्दर उठा और जाकर रसोई से पानी ले आया और फिर आन्या को देते हुए बोला, “लो थोड़ा पानी पी लो…तुमको अच्छा लगेगा…”
आन्या ने इन्दर से पानी का गिलास ले लिया और २ घूँट पानी पीकर गिलास वही पास में रख दिया, इन्दर अभी भी उसके पास ही खड़ा था , फिर कुछ सोचकर आन्या ने इन्दर का हाथ खींचे हुए बोला , “इन्दर प्लीज इधर आओ यहाँ बैठो,  मुझे कुछ बात करनी है… “, उसकी आवाज में अभी भी थोड़ी घबराहट और चेहरे पर हलकी चिंता की रेखाएं थी…

“हाँ , बोलो ना , मैं यही हूँ …” , कहकर इन्दर उसके पास ही बैठ गया ….आन्या ने अभी भी उसका हाथ पकड़ा हुआ था  और उसके हाथ की तेज पकड़ इन्दर को उसके अंदर की टेंशन का एहसास  करा रही थी… मगर वो फिर भी बहुत शांत और संयत बना रहा क्युकी  इसबार वो चाहता था कि आन्या खुद स्वयं को संभाले..
आन्या इन्दर की तरफ घूम कर बैठ गई , उसके दोनों हाथ इन्दर के हाथो पर थे… वो इन्दर को देखते हुए बोली , “मैं सोच रही हूँ कि इंस्पेक्टर को मानव के बारे में सब सच सच बता दूँ…. वैसे भी पता नहीं मैंने उसे अब तक क्यों बचाया….देखो तो कितना घटिया काम किया उसने… उसके लिए यही सबसे अच्छी सजा है ,,,   कुछ दिन जेल में रहेगा तो सारी हेकड़ी निकल कर  बाहर आ जाएगी…”

“दी बिलकुल ठीक कह रही है…. “, अर्थ ने अंदर आते हुए कहा….
मौसी और अर्थ भी कैफे से आ गए थे… साथ में ध्रुव भी था…..अपना सामान टिकाने के बाद मौसी की सबसे पहली नजर आन्या और इन्दर पर गई…
दोनों को इतना शांत,  सहज और एक दूसरे के साथ बैठे देख वो इतना तो समझ ही गई थी कि  इनके बीच बातें हो चुकी है और अब सब ठीक है…इसीलिए उन्होंने अभी दुबारा से उस बारे में कुछ बोलना और पूछना ठीक नहीं समझा….,” आन्या से आराम से बाद में बात करुँगी इस बारे में, फ़िलहाल चुप रहना ही ठीक है…” , मौसी ने मन ही मन सोचा….

“दी बिलकुल ठीक कह रही है….जीजू, उस मानव के बारे में पुलिस को सब बता देते है….बाकि तो फिर पुलिस उसे खुद ही ठीक कर लेगी और साथ में वो उसके दोस्त , क्या नाम है उसका ,,,,, हाँ धीरज ,,,, उसे भी….”, अर्थ ने गुस्से से वही पास में रखी कुर्सी पर बैठते हुए फिर से कहा…तो उसकी बात सुनकर इन्दर बोला ,
“नहीं, मुझे नहीं लगता कि अब हमे ऐसा कुछ करना चाहिए… हलाकि मैंने ही पहले ऐसा बोला था कि अगर  तभी उसको पुलिस में दे देते तो आज ये नौबत नहीं आती मगर तब में और अब में बहुत अंतर है…तब मानव को मेरे और रवि के अलावा कोई नहीं जानता था …. रवि को तो मैं संभाल लेता, कुछ ना कुछ बोलके,,,,,मगर अब उसे सब जानते है.. उससे सब मिल चुके है…मेरे सब दोस्त भी और मेरी बहिन भी….ऐसे में उनको क्या बोलूंगा…. बात जितनी आसान लग रही है उतनी अब रही नहीं अर्थ….”, इन्दर ने एक गहरी सांस भरते हुए कहा ….फिर एक पल रुक कर सबकी और देखते हुए बोला…
“सच कहू तो , मैं आन्या और मानव से जुडी कोई भी बात किसी को नहीं बताना चाहता…और मैं ये बिलकुल नहीं चाहता कि कोई भी आन्या के बारे में अपनी कोई राय बनाये….इसीलिए उस दिन पार्टी में भी जो कुछ भी हुआ था वो भी आज तक किसी को पता नहीं चला…. “

इन्दर की बातें सुनकर आन्या की तो जैसे आँख ही भर आई , “तुम अपने रिश्तो के प्रति कितने ईमानदार और केयरिंग हो इन्दर….मैं सच में….. बहुत लकी हूँ….”, आन्या ने मन ही मन सोचा…

इन्दर की बातों से मौसी और अर्थ भी बहुत भावुक हो गए थे….
“तुम शायद सही कह रहे हो….मैं तुम्हारी बात समझ रही हूँ इन्दर… तुमने तो आज सच में मुझे निरुत्तर कर दिया…. अपने साथी के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए उसके साथ डट कर खड़े रहना और ढाल बनकर उसके आगे अड़ जाना इतना भी आसान  नहीं होता….
और इस शक ने तो ना जाने कितने ही घर बर्बाद किया होंगे..”

“खैर,  जो भी करना है थोड़ा जल्दी सोचो क्युकी इंस्पेक्टर को मैंने ६ बजे बोला था आने के लिए और अभी ५:३० से ऊपर पहले ही हो चुके है… “, मौसी ने घडी  की और देखा तो उनके चेहरे  पर चिंता उमड़ आई….

“अभी तो कुछ समझ नहीं आ रहा मौसी, कुछ भी नहीं… सच कहू तो दिमाग घूम चुका है मेरा…. मानव का नाम लेके तो वैसे भी कोई फायदा नहीं होने वाला क्युकी मानव तो वो हैं नहीं जिसने आन्या पर फायरिंग की…. तो भी केस वही का वही ही रहेगा ….पता नहीं वो कौन है जो आन्या के पीछे पड़ा है और क्यों ? ,,,, फ़िलहाल तो सब भगवान पर छोड़ दिया है ….”, इन्दर ने थोड़ा चिंतित होते हुए कहा…

तभी घंटी बजी,,,,
“शायद वो लोग आ गए”,  कहकर मौसी गेट खोलने चली गई….तो इन्दर ने आन्या को पलके झपकाकर आँखो से शांत और सहज बने रहने का इशारा किया….
कुछ पल बाद उनके साथ इंस्पेक्टर विक्रम और २ अधिकारी अंदर आये….
“आइये बैठिये..”, मौसी ने सोफे की तरफ इशारा करते हुए कहा….आन्या भी इतने उनके लिए पानी ले आई….
“सर क्या लेंगे आप…”, मौसी ने पूछा  तो इंस्पेक्टर  बोला , “मैडम , इतनी फॉर्मेलिटी की कोई जरुरत नहीं है… पानी काफी है अभी के लिए…. हम तो आन्या जी से मिलने आये हैं आज…. मगर चलो अच्छा है अगर आप सारे ही इकठ्ठा मिल गए हो तो…. “, कहकर इंस्पेक्टर आन्या की तरफ देखकर मुस्कुराया, जिस कारण वो थोड़ा असहज हो गई….
“हाँ तो आन्या जी, क्या आप एक बार फिर से हमे ये बताने का कष्ट करेंगी कि उस दिन क्या क्या हुआ था…”, इंस्पेक्टर ने थोड़ा अजीब सी टोन में आन्या से पूछा….और फिर मुस्कुरा दिया….

इंस्पेक्टर के बर्ताव  को देखकर इन्दर बीच में ही बोल पड़ा, “देखिये सर , आन्या पहले बता तो चुकी है सब कुछ,,,,,,, आपने तो फाइल में पढ़ा होगा….फिर दुबारा वही सब पूछकर उसको परेशान करने का क्या मतलब…. आप तो अब उसको ढूढ़िये ना जिसने आन्या पर गोली चलाई थी…..”…..
इन्दर की बातें सुनकर इंस्पेक्टर थोड़ा बिदक गया और इन्दर से थोड़ा उखड़ते हुए बोला , “इन्दर जी , हमे पता है कि हमे किस समय क्या करना है,,,,,,आज आपको तो वैसे यहाँ होना नहीं चाहिए था….मगर फिर भी अगर आ ही गए हो,,,,,,,,,,,,, तो हमारे साथ थोड़ा कोपरेट वोपरेट कीजिये….. अरे ! श्रद्धा जी आपने कुछ बताया वताया नहीं था क्या इनको….”

“देखिये सर , मुझे सब पता…..”, इन्दर इंस्पेक्टर को कुछ जवाब देता इससे पहले ही श्रद्धा ने इन्दर का हाथ पकड़ कर उसे कुछ भी कहने से रोक दिया और फिर इंस्पेक्टर से बोली , “आपको जो भी पूछना है आप पूछ सकते है… आशा है आप हमारा ज्यादा टाइम नहीं लेंगे….”, यह कहकर वो ध्रुव को दूसरे कमरे में ले गई और टीवी लगाकर बैठा आई….

“अरे वाह श्रद्धा जी , आप तो बहुत समझदार है… धन्यवाद ….”, यह कहकर इंस्पेक्टर श्रद्धा की तरफ देख कर मुस्कुराया और फिर आन्या की तरफ मुड़ते हुए बोला, “हाँ तो आन्या जी , क्या बताया था आपने , उस दिन क्या क्या हुआ था…. ???”

“जी , वो …वो…उस दिन मैं मार्किट गई थी तो वहां एक दुकान पर वो लड़का आकर बोला , मैडम आपको पार्किंग में कोई भैया बुला रहे है, तो मुझे लगा इन्दर है इसीलिए मैं वहां चली गई…. मगर वहां कोई नहीं था…मैं वापिस आने के लिए मुड़ी तो एक गोली आकर शीशे से टकराई और मैं भागने के चक्कर में उलझकर गिर गई और मेरे माथे पर चोट लग गई…..इतने में इन्दर और उनके दोस्त आ गए…”
बस यही हुआ था….
“जब किसी ने बुलाया था तो कोई वहां क्यों नही था ? क्या आप इसका जवाब देना चाहेंगी ? इंस्पेक्टर ने उसे थोड़ा कुरेदा…
“जी ,,,,  जी नहीं , म…मु..मुझे कैसे पता होगा ये….” आन्या बुदबुदाई…
“तो और किसे पता होगा मैडम, वहां तो आप ही थी ना,,,,,  चलिए थोड़ा जोर डालिये अपनी यादाश्त पर ,,,, शायद कुछ याद आ जाये…”, कहकर इंस्पेक्टर ने आन्या के नजदीक ही पड़े एक स्टूल पर अपना एक पैर टिकाया और फिर उस अपना एक हाथ टिका कर खड़ा हो गया….
“जी ,,,,,जी,,,,,,,वहाँ वाकई कोई नहीं था ,,,, बाकि और कुछ नहीं है बताने के लिए ,,,, सब बता दिया मैंने…” , आन्या ने थोड़ा झल्लाकर कहा तो इंस्पेक्टर चिल्लाकर बोला,  “तो फिर किसी ने क्यों बुलाया था वहां…..”
“शायद गोली चलाने के लिए….और मुझे मारने के लिए… ” , आन्या ने थोड़ा भरी आवाज में उत्तर दिया…(वो इंस्पेक्टर का चिल्लाना सुनकर काफी घबरा गई थी…)

“फिर झूट….,,,, झूट पर झूट बोले जा रही हैं आप…. वो कौन है आन्या जी जिसको आप बचा रही है और जिसका नाम आप छुपा रही है , बोलिये “,  इंस्पेक्टर दुबारा चिल्लाया तो घबराकर इस बार आन्या  के आंसू निकलने लगे….ये देख इन्दर भागता हुआ आन्या के पास आया और उसे चुप कराते हुए इंस्पेक्टर से बोला , “ये क्या तरीका है आपका इंस्पेक्टर , आप आन्या से ऐसे बात नहीं कर सकते…”

“बात तो मैं सब कर सकू हूँ इन्दर बाबू , इंस्पेक्टर विक्रम नाम हैं मेरा , अगर मेरा मगज घूम जाये , तो हलक में डंडा घुसा कर सब सच उगलवा लेता हूँ मैं,,,,,,,,,समझे आप….. और आप अगर बीच में नहीं ही बोलेंगे तो ज्यादा बढ़िया होगा…वो क्या है ना कि हमारा तरीका थोड़ा अलग है….जो फिर आपको पसंद नहीं आएगा…..  “, यह कहकर इंस्पेक्टर ने एक अधिकारी की तरफ इशारा किया तो उसने एक फाइल से एक पेपर निकाल कर इन्दर की तरफ बढ़ा दिया….इन्दर अभी भी आन्या के पास ही बैठा था , आन्या सुबक रही थी और उसका सर इन्दर के कंधे पर था और इन्दर ने एक हाथ से उसके कंधे को थाम रखा था और उसे चुप करा रहा था….
“क्या है ये ? ” , इन्दर ने उस पेपर को देखते हुए पूछा  तो इंस्पेक्टर बोला , “अरे देखिये तो सही ,,, आन्या जी की मासूमियत का सबूत है ये….”, कहकर इंस्पेक्टर तिरछा मुस्कुराया…

“क्या मतलब है आपका इंस्पेक्टर….आप कहना क्या चाहते है….साफ़ साफ़ बोलिये ना…क्या आप इस तरह हमको परेशान करने आये है क्या?”, श्रद्धा ने इस बार थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए नाराजगी से कहा….तो इंस्पेक्टर  बोला , “हम किसी को बिना बात परेशान नहीं करते मैडम , परेशान तो आन्या जी ने हमे कर रखा है १०-१५ दिन से….ये पेपर पर डिटेल्स देखिये आप लोग…. ये पार्किंग के पास के एक एटीएम की कैमरा डिटेल्स है उस दिन की….जिसमें साफ़ साफ़ दिख रहा है कि आन्या जी पार्किंग की साइड कब गई और फिर उसने दोस्त उधर किस टाइम गए…. इसके अकॉर्डिंग आन्या जी पार्किंग में एक घंटे से ज्यादा टाइम तक रुकी थी……अगर वहां कोई था ही नहीं तो ये वहां कर क्या रही थी एक घंटा,,,? बोलिये ? “, इंस्पेक्टर ने इन्दर को देखते हुए कहा, पर अब इन्दर के पास कोई जवाब नहीं था,,,, फिर इंस्पेक्टर आन्या की तरफ देखकर चिल्लाया , “बोलिये आन्या जी , क्या छुपा रही है आप हमसे , किससे मिलने गई थी आप वहां , किसका नाम छुपा रही हैं आप? बोलिये,  जवाब तो आज आपको देना ही पड़ेगा….”

“नहीं कोई नही है , कुछ नहीं छुपाया मैंने,,,,  “, यह कहकर आन्या जोर जोर से सुबकने लगी…


क्रमश:

रूचि जैन

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