Pearl In Deep
Passion to write

तेरे जैसा प्यार कहाँ part – 32

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हेलो दोस्तों ,
पिछले पार्ट को पढ़ कर आपमें से काफी लोगो के दिल टूटे होंगे, काफी को शायद बुरा भी लगा होगा कि इन्दर ने ऐसा क्यों किया उसने आन्या पर विश्वास क्यों नहीं किया , मगर ऐसा नहीं हैं , इन्दर को तो अभी कुछ पता ही नहीं और ना आन्या से उसने कुछ पूछा तो विश्वास करने न करने की बात ही नहीं , कभी कभी स्थिति ऐसी हो जाती हैं, या ऐसा कुछ अचनाक आँखों के आगे घटित हो जाये जिसकी हमे उम्मीद भी न हो तो हमारे सोचने की शक्ति शून्य हो जाती हैं , और जो हमारे सामने होता हैं हम उसी को सच मान बैठते हैं , यही इन्दर के साथ हुआ। मगर फिर भी उसने वहां आन्या को अकेला नहीं छोड़ा, यही उसके प्यार का सच्चा सबूत हैं ,,,,,
उसका मन बहुत दुखी था और उसे सोचने समझने के लिए कुछ वक़्त चाहिए था शायद इसीलिए उसने उस वक़्त आन्या से इस बारे में बात करना भी सही नहीं समझा ,,,,,,
उनके जज्बात अलग नहीं हैं , प्यार और जीवन में ये सब उतार चढाव आते ही हैं , तभी सच्चे साथी का पता चलता है और तभी सही मायनो में वो प्यार कहता हैं , और तब दिल से बस एक ही बात निकलती हैं , “तेरे जैसा प्यार कहाँ “
माना यह एक कहानी हैं मगर अगर हर कहानी हमारी जिंदगी की सच्चाइयो को छू कर निकल जाये तो वो हमे सच्चे अनुभव दे जाती हैं और दिल में एक छाप भी दे जाती हैं , आप भी आन्या और इन्दर के प्यार , तकरार , दोस्ती, लगाव और मुहोब्बत को मेरे साथ साथ महसूस करते चलिए , फिर देखिये आगे ये सफर कितना हसीन होने वाला हैं ,,,,

– रूचि
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तुझसे नाराज नहीं , हैरान हूँ मैं ,
बेदर्द दुनिया की बातों से परेशान हूँ मैं
ये तो वक़्त की चोट थी जो आ दिल पर पड़ी
पहले तुझको सँभालू या खुद को सँभालू मैं
आसान नहीं सफर मुहोब्बत का
दर्द देने वाले हजारो मिल जाते हैं
दर्द दिल का कहे भी तो कहे किससे,
जख्म देने वालो में अपने ही शामिल हो जाते हैं।।

आन्या पूरा रास्ता सुबक सुबक कर बस रोये ही जा रही थी , न तो वो मौसी को कुछ बता पा रही थी और ना अर्थ को , और ये दोनों ही आन्या को देख देख कर परेशान हुए जा रहे थे।
घर पहुंचते ही आन्या अपने कमरे में भाग गयी , वो बहुत ज्यादा दुखी थी और खुद को इन्दर की नजरो में गुनहगार महसूस कर रही थी , काश मैंने इन्दर को वक़्त रहते सब बता दिया होता तो आज मुझे ये सब नहीं देखना पड़ता , और ना उस मानव ने मेरी शराफत का ऐसा फायदा उठाया होता। आन्या का अन्तर्मन उसे ये सोच सोच कचोट रहा था , मगर अब पछताए होये क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत ,,, मगर अब क्या होगा ,,,,बस यही सब सोच सोच कर उसका मन अंदर तक घायल हुआ जा रहा था।
अर्थ और मौसी भी उसके पीछे पीछे उसके कमरे में पहुंच गए , मौसी लगातार उसे चुप करा रही थी और कारण पूछ रही थी , आखिरकार आन्या ने जैसे तैसे करके टेरेस पर जो कुछ भी हुआ था सब कुछ मौसी और अर्थ को बता दिया। यह सब सुनकर मौसी तो बस अपना सर पकडे बैठी थी , “जिसका डर था वही हो गया आन्या , इसीलिए बोल रही थी बच्चे के जा इन्दर को सब बता दे ,,,, जब हम गलत थे ही नहीं तो डर क्यों ,,,,,,और अब देख उसके सामने बात आई भी तो किस तरह,,,, एक झूट का दुशाला ओढ़ कर,,,,मगर तू चिंता मत कर सब ठीक होगा,,,, इन्दर एक सुलझा हुआ लड़का है ,,,, बहुत समझदार हैं वो,,,,,तुझे जरूर समझेगा वो,,,,,, बहुत प्यार करता हैं वो तुझसे ,,,,”, मौसी आन्या को सांत्वना दिए जा रही थी और उधर अर्थ के खून में उबाल आ रहा था ,,,, “मानव , मैं तुझे जिन्दा नहीं छोडूंगा , तूने मेरी बहिन की जिंदगी दुश्वार करके रख दी हैं ,,,,,अब देख मैं क्या करता हूँ ,,,,, “, यह सब सुनकर आन्या और ज्यादा रोना शुरू कर देती हैं
“ये सब क्यों हो गया मौसी , अब क्या होगा , सब ठीक नहीं हुआ तो,,,,,, इन्दर ने मुझे ही गलत समझा तो,,,,, मेरा दिल बैठा जा रहा है मौसी,,,,,,,मैं उसे कैसे समझा पाऊँगी कि वो सब सच नहीं हैं जो मानव ने उसको कहा , मेरा कोई अतीत नहीं हैं ,,, आप तो जानती हो ना सब,,,,,,बोलो न मौसी ,,,,”, आन्या लगातार सुबक रही थी और यह सब कुछ बोले जा रही थी , इन्दर को खोने का खौफ उसके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था , “एक सच ही तो छिपाया था बस मैंने तुमसे ,,,,,माना गलती हो गयी ,,,,,नहीं छुपाना चाहिए था ,,,,,,मगर उसकी इतनी बड़ी सजा तो मत दो इन्दर,,,प्लीज,,,,,”, अब तक आन्या बहुत ज्यादा टेंशन में आ चुकी थी , और आने वाली अनिश्चितता को सोच सोच कर उसका दिल भर भर कर आ रहा था।

“देखो आन्या , ऐसे रोने से तो सब ठीक नहीं हो जायेगा ,,,,, अब तुमको ही सब ठीक करना होगा ,,,,, जाओ इन्दर से मिलो और उसे सब सच बता दो,,,,,,,सब मतलब सब , एक एक बात , शुरू से आखरी तक ,,,,,, यहाँ तक कि पार्किंग में जो हुआ था वो भी , इससे पहले कि उसे किसी और से पता लगे ,,,,,अभी तो उसे कुछ पता भी नहीं हैं , इससे पहले कि बात बिलकुल हाथ से निकल जाये उसे संभाल लो बेटा,,,,”, मौसी ने आन्या को समझते हुए कहा तो अर्थ चिल्लाया , “नहीं , कोई किसी से नहीं मिलेगा , ना कोई किसी को कुछ समझायेगा , बस बहुत हुआ , हम कल मोहाली जायेंगे , इन्दर खुद को समझता क्या हैं , उसने उस मानव की बात का विश्वास किया मगर मेरी बहिन का नहीं , उसका कोई हक़ नहीं बनता मेरी बहिन को इतना दुःख पहुंचाने का ,,,,,”, कहकर अर्थ आकर आन्या से गले लग जाता हैं और उसका सर सहलाने लगता हैं , “मेरी दी की हालत देखो मौसी , क्या कर दी है उन लोगो ने मिलकर ,,,,,,कोई कही नहीं जायेगा,,,,,कही नहीं ,,,,”, कहते कहते अर्थ की आवाज भी भर्रा जाती हैं।
“इस वक़्त तुम दिल से सोच रहे हो अर्थ , दिमाग से नहीं , इन् सब में न आन्या की गलती हैं और न इन्दर की , उसने तो आन्या को कुछ कहा तक नहीं, यहाँ तक की कुछ पूछा तक नहीं , उल्टा उसे ऐसी स्थिति में भी मेरे पास तक छोड़ कर गया , ये प्यार और केयर नहीं तो और क्या हैं,,,, आन्या को इन्दर से अच्छा जीवन साथी कोई मिल ही नहीं सकता अर्थ , क्या तुम अपनी बहिन की जिंदगी भर की खुशिया नहीं चाहोगे,,,,, तुम खुद को उसकी जगह रखो ,,, फिर सोचो,,,, उसको तो कुछ भी सच्चाई नहीं पता , अचानक से उसके सामने ये सब हो गया और मानव इतना कुछ कह कर चला गया , तो उसकी मानसिक स्थिति भी कैसी रही होगी ,,,,, ये सब सहना इतना भी आसान नहीं,,,,,,,,”, श्रद्धा ने अर्थ को समझाते हुए कहा।
मौसी की बातें सुनकर आन्या और अर्थ अभी थोड़ा शांत हो चुके थे, उनको भी एक आशा की किरण दिखाई देने लगी थी कि हाँ सब कुछ ठीक हो जायेगा , मगर कभी कभी हमारा दिल हमारे दिमाग पर इतना हावी हो जाता हैं कि हमे सही गलत, अच्छे बुरे का कोई होश नहीं रहता ,,,,,,

“आन्या अब बस और नहीं , अब रोना बिलकुल बंद ,,,,,,खुद को मजबूत करो,,,, और अपनी सच्चाई के लिए उठ खड़ी हो ,,,,,अब तुम इन्दर से मिलोगी और उसे सब सच बताओगी ,,,,समझी तुम ,,,,,,हर रिश्ता सच्चाई और विश्वास पर टिका होता हैं मेरी बच्ची अगर नीव आज से ही मजबूत रखोगी तो जिंदगी में कभी कोई परेशानी नहीं आएगी ,,,,,,,इसीलिए ही बोलती थी तुमको ,,,,,,,काश तुम मेरी बात मान जाती तो,,,,,,,,,, “, मौसी ने यह बोलकर एक लम्बी गहरी साँस ली और फिर अर्थ से बोली , “मेरे ख्याल से अभी तुमको भी इन सब चीजों को थोड़ा प्यार और शांति से सुलझाना होगा अर्थ , गुस्से से नहीं , रिश्ते बहुत नाजुक होते हैं , टूटने में पल भर लगता हैं और जुड़ने में अर्सो,,,,,,,चलो अब चलते हैं आन्या को थोड़ा सोने दो ,,,,,,”, मौसी ने अर्थ से कहा तो अर्थ बोला , “आप शायद ठीक कह रही हैं मौसी , मेरा मन दी को इतना दुखी देखकर बहुत ज्यादा विचलित हो गया था ,,,, मगर अभी मैं ठीक हूँ और सब समझ चुका हूँ , और देखना एक दिन सब कुछ ठीक हो जायेगा , मैं दी का पूरा साथ दूंगा ,,,,,,”, कहकर अर्थ ने आन्या को फिर से गले लगा लिया ,,,,,,,
यह देख मौसी मुस्कुराई और फिर बोली , “मैं आज आन्या के पास ही रूकती हूँ ,,,,तुम भी जाकर आराम करो अर्थ, सुबह सोचते हैं आगे क्या करना हैं ,,,,,,कल तो इंस्पेक्टर भी आएगा उस केस के सिलसिले में , उससे पहले ही इन्दर से बात करनी पड़ेगी , मैं सोचती हूँ कुछ इस बारे में , तुम अब आराम करो आन्या ,,,,”, मौसी ने कहा और आन्या को बिस्तर पर लिटा दिया और उसके सर पर हाथ फेरने लगी , कुछ ही पलो में उसकी आँख लग गयी तो अर्थ भी अपने कमरे में चला गया।

उधर होटल के कमरे में इन्दर का मन अभी भी बहुत बैचैन था , रवि भी इन्दर से बार बार यही सब पूछ रहा था कि आखिर उसके और आन्या के बीच ऐसा क्या हुआ कि इन्दर इतनी बड़ी बात बोल रहा हैं , मगर इन्दर अभी भी शांत बना हुआ था , उसके मन में एक अलग ही अंतर्द्वंद चल रहा था , “नहीं नहीं मैं ये सब किसी को नहीं बता सकता , सब आन्या के बारे में क्या सोचेंगे , और फिर क्या पता सच क्या हैं , मेरी आन्या को कोई कुछ कहे या उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुचाये ये मैं बिलकुल बर्दास्त नहीं करूँगा , मुझे अपनी नाराजगी उसी से मिलकर दूर करनी होगी , सिर्फ वही हैं जो मेरे मन में उठ रहे सारे प्रश्नो का उत्तर दे सकती हैं ,,,,, “, यह सोच कर इन्दर उठा और बिना कुछ कहे अंदर कमरे में चला गया , रवि भी उसके पीछे पीछे अंदर आ गया तो उसने रवि की ओर देखते हुए कहा , “मेरे दोस्त , तूने मेरा हर तकलीफ और मुसीबत में साथ दिया हैं , इस बार भी देगा ना ,,,,,,”
“आज कैसी बातें कर रहा हैं तू , दूंगा ना , क्यों नहीं दूंगा साथ , बोल क्या करना हैं ?”, रवि ने इन्दर का हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा तो इन्दर उसकी और देखकर मुस्कुरा दिया , “अभी नहीं वक़्त आने पर बता दूंगा ,,,, अभी तू जा ,,,,”
“तू ठीक तो हैं ना,,,,,,”, रवि ने पूछा तो इन्दर मुस्कुराया और रवि को गले लगा लिया , “हाँ ठीक हूँ साले , इतना भी कमजोर नहीं हैं तेरा दोस्त , बस कभी कभी परिस्थिति हमे कमजोर बना देती हैं ,,,,,,,,,मगर अब मैं समझ गया हूँ कि मुझे क्या करना हैं , उसी के बाद कुछ तय करूँगा,,,,,”, कहकर इन्दर , रवि से अलग हुआ और कमरे में पड़ा सब सामान उठाने लगा , रवि भी कमरा समेटने में उसकी पूरी मदद करता हैं और फिर वहां से चला जाता हैं।

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आर्य फार्महाउस –

“चियर्स ,,,,,,”, मानव अपने फार्महाउस पर ड्रिंक करके अपनी जीत का जश्न मना रहा था मगर धीरज कुछ खास खुश नहीं था, “ये तूने अच्छा नहीं किया मानव ,,,,,कम से कम एक बार मुझे बता तो देता ,,,,,, “
“हाँ ताकि तू मुझे ये सब करने नहीं देता इसीलिए ना ,,,,,,, वैसे तू क्यों आन्या की इतनी चिंता कर रहा हैं , तू मेरा दोस्त है या उसका , बोल ?”, मानव ने लगभग चिल्लाते हुए धीरज से कहा तो धीरज बोला, “दोस्त तो तेरा ही हूँ मगर इसका मतलब ये नहीं कि तुझे कुछ भी करने दूँ ,,,,,,तू खड्डे में गिरेगा तो भी गिरने दू क्या ?”
“बस बस रहने दे ये नाटक , सब पता हैं मुझे ,,,, वैसे भी तू अब उनकी टीम में शामिल हो तो गया हैं ,,,,,, क्यों ? , सही कहा ना मैंने ,,,,,,,”, मानव ने पूरी ड्रिंक गले से उतारते हुए धीरज को घूरते हुए कहा तो धीरज मानव का बाजु पकड़कर बोला , “मतलब क्या हैं तेरा ,,,,?”
“यही कि अब तू मेरा दोस्त नहीं रहा ,,,,,,,उस मीता को पसंद नहीं करता क्या तू , बोल ?”, मानव ने धीरज का हाथ झटकते हुए कहा तो धीरज चिल्लाया , “खबरदार जो तू मीता को बीच में लाया तो,,,,,,,तेरी मेरी दोस्ती के बीच वो कहा से आ गयी ,,,,,,”
“चल हट,,,,,,,,मेरे सामने ज्यादा दोस्ती का नाटक मत कर ,,,,,,,देख ली तेरी दोस्ती भी,,,, “, कहकर मानव ने धीरज को धक्का दिया और फिर बोला , “देख,,,,, मैंने बिना तेरी मदद के भी आन्या से अपना बदला ले लिया ,,,,,,,हा हा हा,,,,,,और कोई कुछ नहीं कर पाया,,,,”, यह कहकर मानव हँसा और फिर उसने दूसरा पेग भी फटाफट गले से नीचे उतर लिया।
“हाँ सुना मैंने, और अभी भी यही कहूंगा कि तूने बहुत गलत किया ,,,,, अभी भी चाहे तो तू सब ठीक कर सकता हैं , जा जाकर इन्दर को सब सच बता दे ,,,,,,,,”, धीरज ने मानव को समझाते हुए कहा तो मानव उसे पीछे की तरफ धकेलता हुआ अपने कमरे में चला गया और उसके मुँह पर दरवाजा बंद कर लिया।

“देखना , तुम एक दिन बहुत पछताओगे मानव ,,,,,,भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती ,,,,,जब पड़ती हैं ना तो अच्छे अच्छे सुधर जाते हैं,,,,,,,,”, धीरज गुस्से में यह सब सोच ही रहा था की तभी उसके मोबाइल पर मानव की माँ आरती का कॉल आने लगता है , ,,,,,,,,धीरज कॉल पिक करता हैं तो फ़ोन उठाते ही उधर से आरती की आवाज आती हैं , “कहाँ गायब हो धीरज ? एक फ़ोन भी नहीं किया तुमने इतने दिन से , क्या चल रहा हैं वहां ?”
धीरज आरती को इन्दर की पार्टी और पार्टी में हुई सारी बातें बता देता है तो उधर से आरती बहुत खुश होकर हसते हुए कहती हैं , “हा हा हा , वाह,,,,,,शाबाश मेरे बेटे , आखिर तूने आज उसे मजा चखा ही दिया ,,,,,,,”,
यह सब सुनकर धीरज को बहुत बुरा लगता हैं और वो आरती को समझाने के इरादे से कहता हैं ,”ये क्या कह रही हैं आप , आपको तो मानव को समझाना चाहिए , ये सब गलत हैं आंटी , ये सब आपकी ही शह हैं आंटी जो मानव आज ये सब कर रहा हैं , कितनी नफरत भरी हैं उसके मन में , आप ही ने मानव को ऐसा बना दिया आंटी , काश आप उसे अच्छी राह दिखाती “, ये सुनकर आरती गुस्से से चिल्ला पड़ती हैं , “हे , हू आर यू , टू टाक टू मी लाइक डेट ,,,,,, अपनी औकात में रहो लड़के ,,,,,,,और जितना कहा है उतना ही करो बस ,,,,,,,,समझे तुम “

यह सुनकर धीरज का सब्र का बाँध टूट ही गया और वो आरती से बोल ही पड़ा, “नहीं आंटी , अब नहीं , बस अब और नहीं , बस बहुत हो गया ,,,,,, मैं दोस्त हूँ मानव का , आपका कोई नौकर या जासूस नहीं जो आप मुझसे इस तरह से बात कर रही हैं ,,,,,मैं अब आपका कोई काम नहीं करूँगा ,,,,,, समझी आप ,,,,”, और ये कहकर वो फ़ोन काट देता हैं।
और आरती अपना सा मुँह लेकर सकपकाती रह जाती हैं।

क्रमश :

रूचि जैन

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