Pearl In Deep
Passion to write

तेरे जैसा प्यार कहाँ part – 31

आज वो कयामत की रात हैं , जब कोई एक दिल टूट जायेगा।
बस रहा था जो नूर बन कर आँखों में , वही एक नासूर जख्म बन जायेगा।।



इन्दर रिसेप्शन पर पहुँचता हैं मगर वहाँ उसे कोई दिखाई नहीं देता । उसने एक बार फिर चारो और नज़ारे घुमा कर देखा ,जब कोई नहीं दिखा तो रिसेप्शन पर बैठी एक लड़की से पूछा , “मैं इन्दर राजवंशी आप ही के होटल में रुका हुआ हूँ, आज आपके ही होटल में मेरी पार्टी भी हैं , क्या अभी कुछ देर पहले मेरे लिए कोई पार्सल आया हैं , ऐसा मुझे एक वेटर ने आकर कहा।”
इन्दर की बात सुनकर वो लड़की बोली , “एक मिनट सर, मैं चेक करके बताती हूँ,,,,,”, फिर वो लड़की किसी को फ़ोन करती हैं और उसके कुछ देर बाद एक बाँदा हाथ में एक बुके लेकर काउंटर पर आता हैं और इन्दर को पकड़ाते हुए कहता हैं, “सर ये आपके लिए कोई छोड़ गया था ,,,,”, इन्दर मुस्कुराते हुए वो बुके अपने हाथ में ले लेता हैं और उसे चारो तरफ से घुमा कर ये देखता हैं कि इसपर कोई कार्ड या स्लिप तो नहीं ताकि पता लग सके कि ये किसने भेजा हैं , तभी उसे साइड में लगा एक छोटा सा कार्ड दिखाई देता है जिस पर उसके लिए बधाईया लिखी थी और साथ ही लिखा था एक मैसेज ,

“जन्मदिन की ढेरो शुभकामनाये
इन्दर ,,,,,,
गिफ्ट तुम्हारा थोड़ा खास है , इसीलिए तुमको यहाँ नहीं बल्कि टेरेस पर मिलेगा ,,,,,

विद लव
———–“

वो मैसेज कार्ड पढ़कर इन्दर के चेहरे पर एक मुस्कराहट आ जाती है , “अच्छा जी, तो ये आप है” ,,,,,,,,,,,,,,,, हम्म,,,, फिर कुछ सोचते हुए बोलता हैं , “गिफ्ट तो वाकई खास है आज आपका,,,, माय स्वीटहार्ट ,,,,मगर इस सब की क्या जरुरत थी ,,,, ऐसे ही बोल देती की टेरेस पर आ जाओ ,,,,, “
“चलो कोई नहीं अब आ जाते हैं,,,,,,वैसे भी अब इतना इन्तजार नहीं कर सकता ,,,,,,हम आ रहे है स्वीटहार्ट ,,,,, “, इन्दर मन ही मन सोच कर खुशी से फूला नहीं समां रहा था। फिर वो वापिस टेरेस की तरफ बढ़ गया।

उधर आन्या टेरेस पर पहुंची तो उसने देखा कि कोई टेरेस की रेलिंग पर खड़ा किसी का इन्तजार कर रहा है , उसने रेड कोट पहना हुआ था और उसकी पीठ आन्या की तरफ थी , “आह , इन्दर ,,,, आखिर वो पल आ ही गए जब मैं आज खुल कर तुमसे अपने दिल की बात कहूँगी,,,,,”, आन्या ने मन ही मन सोचा और आगे की ओर कदम बढ़ा दिए ,,,,, जैसे जैसे वो उसके नजदीक पहुंच रही थी उसके दिल की धड़कने और भी तेज रफ़्तार से बढ़ रही थी ,,,,,,और उसकी साँसे और भी तेज तेज चल रही थी ,,,,, टेरेस पर हलकी ठंडक थी, इक्का दुक्का तारे दिख रहे थे , आसमान में काफी काले बदल थे और हलकी हलकी हवाएं चल रही थी , उसके नजदीक पहुंच कर कुछ कदम पहले आन्या रुक गयी , उसने जैसे तैसे अपनी धड़कनो और तेज चलती साँसों को संभाला और धीरे से कहा , “इन्दर ,,,,,,लो मैं आ गयी ,,,,,,तुमको तुम्हारा जन्मदिन का उपहार देने,,,,,,,”

उधर इन्दर लगभग टेरेस पर पहुंचने ही वाला था ,,,,,, वो बहुत खुश था और आन्या से मिलने के लिए बहुत बेक़रार भी ,,,,,मगर किसे पता था कि आज तो जैसे कोई क़यामत ही उसका वहाँ इन्तजार कर रही थी ,,,,,,,,

आन्या की आवाज सुनकर टेरेस पर खडा मानव ये तो समझ चुका था कि आन्या टेरेस पर आ चुकी हैं और वो उसे इन्दर समझ रही हैं , उसका आधा काम तो बिना कुछ किये ऐसे ही बन चुका था, इससे पहले कि वो पलटता , आन्या पहले ही बोल पड़ी ,,,,,”पलटना मत प्लीज , नहीं तो मैं कुछ भी नहीं कह पाऊँगी ,,,,,”, उसके चेहरे की शर्माहट , उसकी आवाज और उसकी बैचनी , उसके दिल की घबराहटों को साफ़ साफ़ ब्यान कर रही थी।
अचानक से आन्या , आगे बढ़कर,  पीछे से ही उसे अपनी बाहो में भर लेती हैं , उसके हाथ मानव के सीने पर थे और उसका चेहरा मानव की पीठ की साइड , “आई लव यू सो मच , बहुत प्यार करती हूँ मैं तुमसे , आज से नहीं बल्कि उसी दिन से जब से मैंने प्यार को समझा और महसूस किया था ,,,,, तुम ही मेरा पहला प्यार हो और शायद आखिरी भी,,,,,,,”, आन्या ने कहा और अपनी आँखे बंद कर ली ,,,,,,,

“आन्या,,,या,,या,,या,,,,,,,,”, इन्दर टेरेस के गेट पर खड़ा चिल्लाया ,,,,, उसके हाथ से बुके छूट कर नीचे गिर गया ,,,,,,

इन्दर की चिल्लाने की आवाज सुन आन्या ने पीछे मुड़कर देखा तो इन्दर भरी आँखों से उसे घूर रहा था , वो एक दम शांत खड़ा था।
उसे देखकर आन्या के तो पैरो तले जैसे जमीन ही सरक गयी हो।।।।। “इन्दर तुम ,,,,,,,,तो फिर ये कौन हैं ,,,,,”, वो मन ही मन बुदबुदाई , आवाज तो जैसे उसे गले में ही अटक कर रह गयी हो ,,,,,,,,वो एक झटके के साथ मुड़ी और उसकी आँखे एक विस्मय के साथ फ़ैल गयी,,,,,,,,”मानव तुम ,,,,,,,”, वो फिर से बुदबुदाई ,,,,,,,मानव खड़ा मुस्कुरा रहा था , इससे पहले की आन्या कुछ सोच पाती, मानव ने उसके गालो को अपने हाथो में भर लिया और मन ही मन कुटिल हसी हॅसते हुए घबराहट का झूठा नाटक करते हुए बोला, “आन्या तुम परेशान मत हो ,,,, मैं समझाता हूँ ना इन्दर को,,,,, वो प्यार करता हैं तुमसे , वो सब समझेगा ,,,,,”
यह सुन आन्या ने गुस्से से उसका हाथ झटक दिया और चिल्लाई , “अब ये क्या नाटक हैं तुम्हारा , हाथ मत लगाओ मुझे ,,,,,ख़बरदार जो अब तुम हमारे बीच आये तो ,,,,,,”, ये कहकर वो इन्दर की तरफ पलटी ,,,,,,
इन्दर अब भी शून्य सा खड़ा उन दोनों को देख रहा था , मगर उसका शरीर अभी भी बेजान खड़ा था , उसका दिमाग तो पहले ही सुन्न हो चुका था ,,,,,,,,आन्या और मानव की आवाज से जैसे वो शून्य से लौट कर आया हो ,,,,, उसके चेहरे पर गुस्सा , नफरत और आँखों में आंसू अब साफ़ दिख रहे थे,,,,,उसकी ये हालत देखकर आन्या के तो जैसे होश ही उड़ गए हो।
उसकी ऐसी हालत देख अगर कोई मन ही मन मुस्कुरा रहा था तो वो था मानव ,,,,,,, इसे पहले की आन्या उसकी तरफ बढ़ती , मानव तेजी से कदम बढ़ा कर इन्दर के पास पहुंच गया ,,,,, और अनजान और बिचारा सा मुँह बना कर बोला , “हमे माफ़ कर दो इन्दर ,,,,,,, मैंने कभी नहीं चाहा था कि तुमको ये सच ऐसे पता चले ,,,,,,,आन्या की कोई गलती नहीं ,,,,,आखिर कोई अपना अतीत आसानी से कहा भूल पाता हैं ,,,,,,”, मानव की बात सुनकर इन्दर ने रुसवाई भरी नजरो से आन्या की तरफ देखा , उसे तो ये यकीन ही नहीं हो रहा था कि मानव और आन्या एक दूसरे को पहले से जानते हैं और उसे अब तक भी इस बात का पता नहीं था ,,,,,,,
“ये क्या बकवास है….नहीं इन्दर ऐसा कुछ भी नहीं हैं , मेरा कोई अतीत नहीं,,,,,,,तुम प्लीज इस मक्कार की बातो का यकीं मत करो,,,,, ऐसा कुछ भी नहीं हैं ,,,,, मैं सिर्फ तुमसे प्यार करती हूँ,,,,,,,,”, आन्या रोते हुए इन्दर के करीब आकर उसका हाथ पकड़कर बोली तो इन्दर ने गुस्से से उसका हाथ झटक दिया , इन्दर का ऐसा रिएक्शन देख मानव तो जैसे मन ही मन ख़ुशी से उछल पड़ा ,,,,,, यही तो चाहता था वो,,,,, और कुदरत का कहर तो देखो मानव को तो कुछ करना भी नहीं पड़ा , सब कुछ अपने आप ही होता चला गया ,,,,,
अपने दिल की भावनाओ को छुपाते हुए मानव ने एक बार फिर आग में घी डाला , “काश मुझे पता होता कि आन्या मुझे आज पार्टी में देख मेरे पीछे पीछे यहाँ तक आ जाएगी तो मैं पार्टी में आता ही नहीं ,,,,,,, मुझे माफ़ कर दो इन्दर ,,,,,,”, और ये कहकर वो चुप चाप वहाँ से मुस्कुराता हुआ सरक गया , टेरेस के गेट पर पहुंच कर उसने मुड़कर एक बार फिर आन्या को देखा, जो अभी भी वही कि वही खड़ी नफरत भरी निगाहो से उसी को जाता देख रही थी ,,,,,, ये देख मानव ने एक कुटिल मुस्कराहट के साथ उसे एक फ्लाइंग किस दी और मुस्कुराता हुआ वहाँ से चला गया ,,,,,,,

आन्या और इन्दर अभी भी जो के त्यों खड़े थे ,,,,,,,, हवाएं तेज हो चुकी थी और बिजली भी चमक रही थी ,,,,,,, जैसे वो उन दोनों के दिलो में उठ रहे तूफ़ान को ही बया कर रही हो,,,,, चाँद भी बादलो में छुप चुका था और अब टेरेस पर केवल था तो अँधेरा और वहाँ पसरा सन्नाटा , जब भी बिजली चमकती तो दोनों का ही आंसू और तकलीफ से भरा चेहरा उस कड़कड़ाती बिजली में कुछ पल के लिए चमक जाता और फिर दुबारा अँधेरा पसर जाता,,,,,,,,, कुछ पल के लिए दोनों ही निःशब्द से खड़े रहे ,,,,,, इन्दर को तो अभी तक यकीं ही नहीं हो रहा था कि वो क्या करे ,,,,,, अपने प्यार पर विश्वास या जो उसकी आँखों ने देखा और मानव ने कहा उस पर ,,,,,,
इससे भी बुरी हालत आन्या की थी जिसका सब कुछ उसी की गलती से कुछ ही पलो में लुट चुका था ,,,,,,अब ना तो उसके पास कोई तथ्य था खुद को साबित करने के लिए और ना ही हिम्मत बची थी ,,,,,, वो अंदर से टूट चुकी थी और ऐसे ही अपने घुटनो पर टेरेस की जमीन पर गिर गयी और अपने चेहरे को अपने दोनों हाथो से छुपाकर आसमान की तरफ मुँह कर जोर जोर से चीत्कार करने लगी ,,,,,,उसके रोने की आवाज उसकी वेदना को साफ़ साफ़ दिखा रही थी ,,,,,, मगर आज उसे समझने वाला शायद कोई नहीं था ,,,,,, उसने मन ही मन महसूस किया,,,,,,,,
मगर शायद ऐसा नहीं था अभी भी शायद एक दिल था जो केवल और केवल उसके लिए धड़क रहा था , उसको इस तरह चीत्कार करते देख इन्दर का मन अंदर तक पसीज गया , उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था वो क्या करे ,,,,, वो खुद अंदर तक दुखी था और कुछ वक़्त अकेला रहना चाहता था मगर आन्या को भी वो इस हालत में नहीं छोड़ सकता था।
वो कुछ देर खड़ा ऐसे ही उसे देखता रहा और फिर झुककर उसके करीब ही बैठ गया और फिर उसके कंधे पकड़ कर उसे उठाता हुआ बोला , “यहाँ से चलो आन्या , अभी तुमको मौसी के साथ होना चाहिए , वो तुम्हारा इन्तजार कर रही होंगी,,,,,,,”, इन्दर की बात सुन आन्या ने एक उम्मीद भरी नजर से इन्दर की ओर देखा तो उसने नज़ारे घुमा ली ,,,,,,

इन्दर की आँखें आंसू और तकलीफ से भरी हुई थी और रह रह कर मानव के कहे एक एक शब्द से उसका दिल अभी तक छलनी हो रहा था ,,,,,,,
इन्दर के नजर फेरते ही आन्या के आंसू भरी आँखों से बौछार फूटकर उसके गालो पर बह पड़ी ,,,,,,,मगर फिर भी हिम्मत कर खड़ी हुई और इन्दर की तरफ देखकर भरी आवाज में बोली , “इन्दर ,,,,, सुनो ना प्लीज ,,,,,,,, मुझपर विश्वास ,,,,,,,”, उसकी बात पूरी होने से पहले ही दूसरी तरफ देखते इन्दर ने कहा ,,,,,, अभी इस बारे में कुछ और कहना ठीक नहीं होगा आन्या ,,,,, पहले चलो यहाँ से , तुम मौसी के साथ घर जाओ,,,,, मैं भी रूम पर जाना चाहता हूँ ,,,,,, बहुत थक गया हूँ ,,,,,,,चलो,,,,,,,
उसकी बात सुनकर आन्या एक बार फिर सिसक पड़ती हैं मगर खुद को संभालती हुई इन्दर के पीछे पीछे टेरेस से हॉल में आ जाती हैं ,,,,,
“आंसू पूछ लो,,,,,, वरना सब पूछेंगे क्या हुआ ,,,,,,वो रही मौसी जाओ,,,,,”, इन्दर ने कहा और हॉल से बाहर की ओर निकल गया ,,,,,,

इन्दर को जाता देख आन्या का दिल अंदर तक तड़प गया मगर फिर भी वो ऐसे ही खड़ी इन्दर को जाता देखती रही ,,,,, आन्या को अकेले खड़ा देख और इन्दर को ऐसे वहाँ से जाता देख मौसी भागकर आन्या के पास आई और उससे पूछने लगी , “आन्या कहा थी तुम और ये इन्दर ऐसे कहा चला गया ,,,,,”, ये सुनते ही आन्या मौसी से लिपट कर रो पड़ी ,,,,”चुप चुप आन्या क्या हुआ ,,,, ऐसे यहाँ नहीं बच्चा,,,सब लोग देखेंगे तो क्या कहेंगे,,,,,, क्या हुआ ,,,, तुम तो इतना खुश थी ,,,,,,,अच्छा रुको,,,,, हम घर चलते है फिर बात करेंगे ,,,,,तुम शांत हो थोड़ा मैं अर्थ को बुला लू जरा ,,,,,”, कहकर मौसी अर्थ को बुला लाती हैं और फिर वो लोग भी पार्टी छोड़ के निकल जाते हैं।।।।।
सब कुछ इतना जल्दी हुआ कि किसी को कुछ समझने का मौका नहीं मिला , रवि भी काफी परेशान था कि ये अचानक इन्दर कहा गया और मौसी भी बिना कुछ कहे एक दम से यहाँ से क्यों चली गयी।
फिर भी वो धैर्य से काम लेता हैं और धीरे धीरे सभी को वहाँ से विदा करता हैं ,,,,,,संध्या को भी मीता और आलिया के साथ उन्ही के रूम में भेज देता हैं और फिर सब कुछ निपटाकर इन्दर के कमरे में पहुंच जाता हैं ,,,,,,,कमरे में अँधेरा था , उसने इन्दर को आवाज लगायी मगर कोई उत्तर नहीं मिला तो रवि काफी घबरा गया ,,,,, उसने जैसे तैसे लाइट का स्विच ढूढ़ा…..इस बीच काफी सामान उसके पैरो से टकराया ,,,,,,,कमरे की लाइट जलाते ही उसके होश फाख्ता हो गए क्योकि चारो ओर सामान बिखरा पड़ा था जैसे किसी ने अपने दिल का गुबार अभी अभी उन बेजान चीजों पर निकला हो ,,,,,,उसने घबराकर चारो ओर निगाह दौड़ाई और इन्दर को आवाज लगायी फिर बालकनी खुली देख उधर की ओर दौड़ा ,,,,,”इन्दर,,,,,,इन्दरर,,ररररर,,,,, “
इन्दर बालकनी में कुर्सी पर बिलकुल शांत बैठा था ,,,,,, उसका सर कुर्सी पर पीछे की ओर टिका हुआ था और उसकी आँखें बंद थी और पैर आगे टेबल पर एक के ऊपर एक रखे थे ,,,,,,,
“इन्दर ,,,,,, क्या हुआ दोस्त ,,,,ऐसे पार्टी छोड़ कर क्यों आ गया ,,,,,”, रवि ने इन्दर के कंधे पर धीरे से हाथ रखते हुए कहा।
रवि की आवाज सुन इन्दर ने आँखे खोले बिना ही कहा , “आज मुझे अकेला छोड़ दे रवि ,,,,,,, आज मेरे लिए कयामत की रात हैं,,,,”
“मगर क्यों, आज क्यों अकेला छोड़ दू तुझे वो भी तेरे जन्मदिन पर , ,,,,,,, कयामत की रात हैं?,,,,,,क्यों , ऐसा क्यों बोल रहा हैं ?,,,,,,,,ऐसा क्या हो गया इन्दर जो तू मुझसे छुपा रहा हैं “, रवि ने गुस्से में उसे झिंझोरते हुए उसके करीब बैठते हुए कहा तो इन्दर हल्का सा मुस्कुराया और बोला , “ठीक हैं , आ बैठ फिर, तू भी देख ले तमाशा मेरी बर्बादी का , मुझे तिल तिल मरते देखने का ,,,,,” और ये कहते कहते उसकी आँखों में आंसू भर आये तो रवि भी भर्राई सी आवाज में चिल्लाया ,”साले, हो क्या गया हैं बोलता क्यों नहीं ,,,,,,,मेरी जान हलक तक आ गयी हैं,,,,,,कुछ झगड़ा हो गया क्या आन्या के साथ ,,,,,,,”

“सब ख़तम हो गया मेरे यार , सब ख़तम ,,,,,,,,,,,,,,,,,,सब कुछ ख़तम हो गया ,,,,,,,,”, और ये बोलकर इन्दर रवि के गले लगकर चीख चीख कर रोने लगता हैं ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,




क्रमश :

रूचि जैन




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