इन्तजार हैं मुझे उन पलों का, जब मुहब्बते इजहार होगा।
सामने मेरा मेहबूब खड़ा होगा और होंठो पर मेरे इकरार होगा।।
रात के ११:४५ हो रहे थे और आन्या की आँखों में नींद का नमो निशान नहीं था। बिलकुल अभी अभी अर्थ उसके कमरे से उठ कर गया था। वो लोग काफी देर तक बातें करते रहे थे। अर्थ उससे मनाली में आने के बाद का सारा हाल जानना चाहता था ताकि वो भी किसी निष्कर्ष पर पहुंच सके कि आखिर कोई आन्या के पीछे क्यों पड़ा हैं, किसी को आन्या को मार कर क्या फायदा और फिर उनका कोई बिज़नेस राइवल भी नहीं हैं , आन्या के पिता और चाचा तो वैसे ही बहुत शांत और उदार व्यक्तित्व के लोग हैं, फिर आखिर कोई क्यों ये सब कर रहा हैं?
आन्या की बातें सुनने के बाद अर्थ का सीधा शक मानव के ऊपर ही जा रहा था मगर जब आन्या ने ये बताया कि दूसरी बार गोली चलने के वक़्त मानव भी आन्या के साथ ही था तो वो गोली कैसे चलवा सकता हैं, तो इस बात पर अर्थ ने यहाँ तक बोल दिया था कि हो सकता हैं उसने ही किसी को सुपारी दे रखी हो और खुद आन्या के आगे अच्छा बन रहा हो। ताकि बाद में उसपर कोई शक न कर सके।
मगर वो कहते हैं न कि जो खुद अच्छा होता हैं उसे सब अच्छे ही नजर आते हैं और जो बुरा होता हैं उसे सबमें कमिया ही नजर आती हैं , इसीलिए आन्या ना चाहते हुए भी बार बार मानव का पक्ष ले जाती थी जो किसी को भी नागवार गुजरेगा ही। और कोई भी यही समझेगा कि आखिर आन्या चाहती क्या हैं क्यों उस मानव का पक्ष ले रही हैं।
यही अर्थ के साथ हुआ , उसे आन्या कि बातें सुनकर गुस्सा आ गया और उसने आन्या से पूछ ही लिया कि वो मानव का पक्ष क्यों ले रही हैं बल्कि उसे तो जाकर इंस्पेक्टर को उसका नाम बोल देना चाहिए और जो भी उसने अब तक किया उसके लिए सबक सीखना चाहिए। मगर पांचो अंगुलिया एक जैसी नहीं होती दुनिया में बहुत से ऐसे लोग है जो बुरे का बदला बुरा नहीं सोचते , वही आन्या के साथ हो रहा था।
खैर इस बात पर आन्या और अर्थ की काफी बहस भी होती हैं। मगर फिर मौसी आकर बातों को संभाल लेती हैं और अर्थ को लेकर वहाँ से यह कहकर चली जाती है कि कल का दिन बहुत व्यस्त हैं तो अब तुम सब सो जाओ।
मगर नींद किसी की आँखों में नहीं थी,,,,,, , इधर आन्या अपने बिस्तर पर लेटे हुए अब तक अपने साथ हुयी सभी बातों को सोच रही हैं तो उधर अर्थ अपने कमरे में आन्या की बताई सारी बातो पर गौर कर रहा था , ये सोचकर कि क्या पता कोई सुराग ही हाथ लग जाये।
बाहर हल्की हल्की बूंदा बंदी शुरू हो गयी थी। आन्या भी अपनी आँखें बंद करके सोने की कोशिश कर रही थी कि तभी आन्या का फ़ोन बजा। कमरे में अँधेरा था , आन्या ने घबराकर अपना फ़ोन टटोला , इन्दर का कॉल , इस वक़्त ? उसने मन ही मन सोचा , तभी उसकी निगाह फ़ोन की घडी पर गयी , और कुछ सोचकर उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी , अभी रात का १२ बजकर ०२ मिनट हो चुका था।
आन्या के फ़ोन उठाते ही इन्दर उधर से मुस्कुराते हुए बोल पड़ा , “मुझे जन्मदिन की बधाई नहीं दोगी क्या ? हम्म , मैंने सोचा मैं ही फ़ोन कर लेता हूँ , तुम पता नहीं करो या नहीं,,,,,”
“क्यों , ऐसा क्यों लगा , मैं करती तो हूँ ही विश , अब नहीं तो सुबह ही सही, मगर करती जरूर फ़ोन,,,,,,”, आन्या ने प्यारी सी मधुर आवाज में कहा।
“मगर मैं तो चाहता था कि तुम ही सबसे पहले मुझे बधाई दो, इसीलिए तो मैं कब से फ़ोन हाथ में लिए बैठा था , जैसे ही १२ बजे फ़ोन मिला दिया ताकि और किसी का फ़ोन न आ जाये ,,,,, “, इन्दर ने मुस्कुराते हुए थोड़ा भोले अंदाज में कहा तो सुनकर आन्या खिलखिलाकर हस पड़ी और बोली , “हे भगवान, कितना क्रेज हैं तुमको ,,,,,,,,मुझे नहीं पता था मिस्टर इन्दर कि आपके अंदर एक छोटा बच्चा अभी भी कही छुपा हुआ हैं ,,,,,वैसे जन्मदिन की ढेरो शुभकामनाये आपको “
आन्या की बात सुनकर इन्दर भी खिलखिलाकर हँस पड़ा और बोला , “हम्म , जी धन्यवाद , वैसे ये जन्मदिन का क्रेज नहीं हैं ये तो तुम्हारे साथ अपना पहला जन्मदिन मनाने का क्रेज हैं ,,,,,,,अब तुम खुद ही देख लो , ऐसा ही हूँ मैं , झेल पाओगी मुझे अपनी पूरी जिंदगी ?”
इन्दर के ऐसे अचनाक पूछे गए प्रश्न का आन्या कोई जवाब नहीं देती और बस हस देती हैं तो इन्दर बोलता हैं , “बस इसी चुप्पी से डर लगता हैं मुझको , तुम कुछ साफ़ साफ़ कहती ही नहीं कभी ,,,,,,मैं तुमको पसंद तो हूँ ना”, इन्दर ने इतने भोलेपन से पूछा कि आन्या सुनकर जोर से हस पड़ी , “बुद्धू कही के ,,,,,”
“बुद्धू तो मैं हूँ , और दीवाना भी , सिर्फ और सिर्फ तुम्हारे प्यार में , अच्छा लाओ मेरा जन्मदिन का उपहार तो दे दो , वैसे मेरा गिफ्ट याद तो हैं न तुमको ?”, इन्दर ने थोड़ा प्यार भरे लहजे में कहा तो आन्या मुस्कुराते हुए धीरे से बुदबुदाई , “हम्म , याद हैं,,,,,, मगर वो तो कल मिलेगा ना”
“अरे कल भी दे देना , मगर अब भी तो दे दो , कह दो ना वही जो मैं सुनने के लिए हमेशा बेक़रार रहता हूँ मगर तुम कहती ही नहीं “, इन्दर ने थोड़ा रोमांटिक होते हुए शिकायती अंदाज में कहा तो आन्या फिर से खिलखिला उठी और बोली , “इन्तजार का फल मीठा होता हैं जनाब , आप भी थोड़ा इन्तजार कीजिये ,,,,,”
“हम्म , ये बात हैं, तो ठीक है इसके लिए तो मैं कितना भी इन्तजार कर सकता हूँ, फिर कल तो अब आ ही गयी समझो ,,,,,मगर फिर तुम भी रिटर्न गिफ्ट के लिए तैयार रहना , समझी स्वीटहार्ट ,,,,”, इन्दर ने शैतानी मुस्कराहट के साथ कहा तो आन्या थोड़ा शरमा गयी।
इन्दर की बातों का मतलब तो उसे सब समझ आ रहा था मगर फिर भी अनजान बनकर बात बदलते हुए बोली ,
“अच्छा सुनो , वो आज, अर्थ भी आ गया हैं , कल,,,ल,,ल,,,, वो,,,, भी आएगा साथ ,,,,तो,,,,,,,”, आन्या ने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा तो इन्दर हंसकर बोला , “अरे पगली , मैंने तो खुद ही बोला था तुमको कि अर्थ आ जाये तो उसको भी लाना साथ , फिर इतना घबराकर क्यों बोल रही हो ,हम्म, इस बहाने मेरा उससे भी मिलना हो जायेगा ,,,,, “
“ठीक हैं फिर कल मिलते हैं “, आन्या ने कहा तो इन्दर गुस्से से बुदबुदाया , “कितनी जल्दी हैं फ़ोन रखने की, जाओ सो जाओ , एक मैं हूँ कि मुझे नींद ही नहीं आ रही , मेरा सारा सुख चैन तो तुम ही ले उड़ी हो ,,,,,”
“क्या?, समझी नहीं “, आन्या ने पूछा।
“कुछ नहीं सो जाओ , मजाक कर रहा हूँ , वैसे भी प्रतीक्षा में माँ का फ़ोन आ रहा हैं , उनसे भी बात कर लू , वो तो आ ही नहीं पाएंगी कल ………. और फिर मुझे तो अभी अपने चाँद से भी बातें करनी हैं ,,,,,समझी “, इन्दर ने मुस्कुराते हुए कहा तो आन्या भी खिलखिला उठी , “हम्म , तो फिर आप कीजिये अपने चाँद और तारो से बात , हम कल मिलते है आपसे ,,,, बाय गुड नाईट”
“बाय स्वीटहार्ट , गुड नाईट , लव यू “, इन्दर ने कहा और मुस्कुराते हुए फ़ोन रख दिया।
अब आन्या के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान थी , उसकी सारी परेशानिया , तकलीफे और गुस्सा उस ५-१० मिनट की बातों में ही छू हो चुका था। हालांकि नींद उसे अभी भी नहीं आ रही थी मगर तब वजह गुस्सा थी और अब इन्दर की प्यारी बातें , वो बार बार बिस्तर पर इधर उधर करवटें बदल रही थी और बार बार इन्दर से फ़ोन पर हुई बातें ही उसके मस्तिष्क में आ जा रही थी , जो छोड़ जा रही थी ,एक मीठी सी मुस्कान उसके गुलाबी होंठो पर ,,,,,, 🙂
और इन्ही ख्वाबो खयालो में खोये खोये, कब उसकी नींद लग गयी उसे पता ही नहीं चला।
*******
कल रात से ही हल्की बूंदा बंदी हो रही थी , जिस कारण मौसम में नमी और ठंडक अच्छी हो गयी थी। मौसम जितना सुहाना था आज दिन उतना ही आशिकाना भी था। जिस दिन का इन्जार सभी इतनी बेसब्री से कर रहे थे वो दिन आज आ ही गया था।
सुबह की पहली किरण के साथ ही इन्दर के फ़ोन की घंटिया बजनी शुरू हो गयी थी और होती भी क्यों ना , आज का दिन उसके लिए एक महत्वपूर्ण दिन था।
होटल के कमरे पर सुबह से ही भाग दौड़ वाला माहौल था , सब एक्साइटेड थे तो व्यस्त भी , सबसे ज्यादा खुशी तो संध्या के चेहरे पर दिख रही थी , आज वो अपने होने वाली भाभी आन्या से भी मिलने वाली थी और अब तो कोई और भी था जिसके आने का इन्तजार उसका दिल बेचैनी से कर रहा था।
ना चाहते हुए भी वो बार बार अपने नजदीक मानव के होने का छलावा महसूस कर रही थी , कभी बाथरूम में अपना चेहरा धोते-धोते अपने पीछे खड़े हुए, तो कभी शीशे के आगे अपने लिए कपडे पसंद करते हुए , कभी बालकनी में कॉफी लेके खड़े हुए , तो कभी अपने बालो का स्टाइल पसंद करते हुए मानव का हाँ और ना में सर हिलाते हुए ,,,,,,,
बार बार ये छलावा उसके होंठो पर एक मुस्कराहट छोड़ जाता था और हर बार वो हसकर अपने सर पर धीरे से एक थप्पड़ लगा लेती थी।
रवि भी पार्टी की पूरी तैयारियों में मगशूल था उसने इन्दर को इन सब से दूर ही रखा था ताकि शाम को वो उसे एक सरप्राइज दे सके।
उधर मीता और आलिया भी रवि का पूरा साथ दे रही थी साथ ही अपने सजने सवरने की पूरी तैयारियां कर चुकी थी।
संध्या , मीता और आलिया ने शाम की पार्टी के सजने सवरने के लिए होटल में ही एक पार्लर में अपॉइंटमेंट लिया हुआ था।
उधर आन्या भी आज सुबह से ही चहक रही थी , उस पर तो अभी रात की खुमारी का ही असर दिख रहा था। उसके व्यवहार में रातो रात आये बदलाव से सबसे ज्यादा मौसी खुश थी क्योकि वो चाहती थी कि आन्या इन्दर के इस विशेष दिन को उसके साथ बिना किसी परेशानी के, दिल से जिए।
” इन्दर ने अब तक आन्या का हर पल साथ दिया है , अब आन्या की बारी हैं “, मौसी ने मुस्कुराते हुए मन ही मन सोचा।
आन्या के व्यवहार से अर्थ भी हैरान था क्योकि कल रात की हुई बहस के बाद आज आन्या किस मूड से उठेगी ये तो उसने कल रात ही सोच लिया था और उसका सामना करने के लिए खुद को पक्का भी कर लिया था , मगर ये क्या , सुबह उठते ही , अर्थ के लिए चाय आन्या ही उसके कमरे में लेकर गयी और चहकते हुए उसके कमरे की खिड़कियों से परदे हटाने के बाद सोये हुए अर्थ की रजाई खींच कर बोली , “चल उठ कितना सोयेगा , आजा बाहर चलकर चाय पीते हैं , देख तो आज क्या मस्त मौसम हैं ” , और फिर खिलखिलाकर हंस पड़ी….
उसकी खिलखिलाहट इतनी असरदार थी कि अर्थ आश्चर्य से एक ही आवाज में बिस्तर छोड़ कर उठ जाता हैं , उसे ऐसा लगा मानो उसकी दी उसके पास वापिस लौट आई हो,,,,,,,,,,और दोनों भाई बहिन साथ बैठ कर मौसम का मजा लेते हुए सुबह की चाय पीते हैं।
******
आर्य फार्महाउस –
आज की पार्टी का सबसे ज्यादा इन्तजार तो जैसे मानव को ही था। आज तो वो अपने रोज के रूटीन से भी बहुत पहले उठ कर बैठ गया था और बाहर बागीचे में बैठा चाय पी रहा था।
“गुड मॉर्निंग यार , तू इतनी सुबह सुबह क्यों उठ गया आज ? रात सोया भी था या नहीं ,,,,,”, धीरज ने बगीचे में आते हुए हंसकर मानव के पास पड़ी कुर्सी पर बैठते हुए कहा।
“बस यही समझ ले कि सोया ही नहीं था ,,,,,”, मानव ने तिरछा मुस्कुराते हुए कहा तो धीरज बोला, “अबे सुबह सुबह क्यों दिमाग का दही कर रहा हैं , साफ़ साफ़ बता ना,,,,,”
“भूल गया आज क्या दिन हैं ? शाम को तैयार रहना इन्दर की पार्टी के लिए ,,,,,,,,आज के दिन का ही तो इन्तजार कर रहा था कबसे,,,,,,”, मानव ने शैतानी मुस्कराहट के साथ धीरज से कहा तो धीरज अपना सर पीटता हुआ बोला , “तू अब भी नहीं मानेगा ना ,,,,,, बहुत जिद्दी हैं तू , खुद भी डूबेगा और मुझे भी लेके डूबेगा , हैं ना ?,,,,,,,,भगवान जाने क्या चल रहा है तेरे दिमाग में,,,,पर जो भी चल रहा है अच्छा तो बिलकुल नहीं होगा इतना तो मुझे पता हैं ,,,,,,,”
यह सुनकर मानव हसता हुआ बोला , “चल जा तुझे माफ़ किया,,,,, तू इश्क़ लड़ा और मुझे मेरे हाल पर छोड़ दे ,,,,,,, बस इतना समझ ले कि अगर आन्या मेरी नहीं तो मैं उसे इतनी आसानी से इन्दर की जिंदगी में भी चैन से नहीं रहने दूंगा ,,,,,,,,”, यह कहकर मानव कुछ सोचते हुए एक अजीब सी मुस्कुराहट देता हैं और उठ कर अंदर चला जाता हैं ,,,,,,।
क्रमश:
रूचि जैन
🤩🤩 likes and comments ki prateeksha rahegi…..🥰
ये कहानी मेरी पहली लम्बी रचना हैं और मेरे दिल के बेहद करीब हैं , कहानी के किरदारों को अपने अंदर करीब से जीकर ही आगे बढ़ पा रही हूँ। आप लोग भी आन्या और इन्दर के प्यार के इन एहसास को खुलकर महसूस करे और उन हर पलों को जिए।।।।।।
आशा करती हूँ आप लोगो को ये कहानी पसंद आ रही होगी , आप लोगो के सुझाव का सदैव स्वागत हैं ,
😉😉😁🥰