हम बेखौफ इस मुहोब्बत को अंजाम देंगे एक दिन।
फिर रास्ते में चाहे, कितने ही कांटे भरे हो।।
मनाली पुलिस थाना –
“बस , ये , ये जानकारी इकट्ठा की अब तक तुमने उसके बारे में , ये ,,,,”, एक फाइल को मेज पर पटकते हुए इंस्पेक्टर चिल्लाया , “इंस्पेक्टर विक्रम नाम हैं मेरा , अगर मेरा मगज घूम जाये , तो हलक में डंडा घुसा कर सब सच उगलवा लेता हूँ मैं “, इंस्पेक्टर विक्रम ने एक टीम मेंबर को गुस्से से भरी लाल आँखों से घूरते हुए कहा।
“सर ,,,,, सर,,,,,वो,,,,उस स्केच वाले आदमीं का कुछ पता नहीं चल रहा ,,,,, वो, वो माफ़ी चाहते हैं सर ,,,,,”, उस मेंबर ने घबराकर कहा तो इंस्पेक्टर ने अपना हाथ वही मेज पर जोर से मारते हुए चिल्लाया , “तुम सब बेकार हो , किसी काम के नहीं , मगर मैं ये केस अपने हाथ से नहीं जाने दूंगा , आज तक ऐसा नहीं हुआ कि कोई केस मुझे मिला हो और वो अधूरा रह गया हो।”
ये कहकर वो अपनी चेयर पर कुछ देर के लिए, पीछे की साइड सर टिका कर बैठ जाता हैं , और अपनी आँखें बंद करके कुछ सोचने लगता हैं , उसके जूते लगातार जमीन को थपथपा रहे हैं। फिर कुछ देर बाद वो सीधा होता हैं और अपने दोनों हाथ मेज पर टिका कर बैठ जाता हैं और सब मेंबर्स को नजदीक आने का इशारा करता हैं।
“अब सुनो , अब तुम सब वो करोगे जो मैं अब तुमसे कहने वाला हूँ। ,,,, आज सुबह ही मुझे खबर मिली है कि मिस्टर इन्दर कल अपने जन्मदिन का कोई फंक्शन कर रहे हैं , वहाँ सब लोग आएंगे जो भी उनके जानकार हैं , मिस आन्या भी और शायद उनके पीछे पीछे वो भी जिसने उनको पार्किंग में बुलाया या जिसने उनके ऊपर गोली चलाई थी , वो एक भी हो सकता हैं , २ भी और कई सारे भी , मुझे लगता हैं कि एक बार फिर आन्या जी के ऊपर हमला हो सकता हैं , मैं चाहता हूँ कि हम इस अवसर का फायदा उठाये , तुम सब लोग मेहमान बनकर मिस्टर इन्दर की पार्टी में फ़ैल जाना और हाँ , हर एक शख्श पर नजर रखना, बाकि मिस्टर इन्दर से मैं बात कर लूंगा। समझ गए सब लोग ? कुछ पूछना हैं किसी को ?”, इंस्पेक्टर विक्रम ने सबको एक नजर घूरते हुए कड़कते हुए कहा।
“नहीं सर, हम तैयार हैं,,,, “, सब एक साथ बोले।
“बहुत अच्छे ,,,,,जाओ ,,,,,”, बोलकर इंस्पेक्टर ने एक तिरछी मुस्कान दी और फिर सबके जाने के बाद कुछ सोचते हुए वही स्केच उठाकर देखते हुए बोला, “इंस्पेक्टर विक्रम नाम हैं मेरा , अगर मेरा मगज घूम जाये , तो हलक में डंडा घुसा कर सब सच उगलवा लेता हूँ मैं, अब कहा जायेगा मुझसे बचकर तू , ऐसा जाल बिछाऊंगा कि तू , यू,,,यू ,,,,मेरी मुट्ठी में आ जायेगा ,,,,हा हा हा “, कहते हुए इंस्पेक्टर मुट्ठी भीचते हुए मुस्कुराया।
***
शाम का समय हैं , उधर अर्थ भी मौसी के यहाँ पहुंच जाता हैं। आन्या अर्थ को देख कर बहुत खुश होती हैं और भागकर उसके गले लग जाती हैं।
“कैसी हो दी ? कितने दिन बाद देख रहा हूँ मैं आपको”, अर्थ ने मुस्कुराते हुए आन्या से सवाल किया।
“हम्म, आओ बैठो ,,,,,,,,,मैं अच्छी हूँ , तुम कैसे हो , घर पर सब कैसे हैं ?”, आन्या ने अर्थ को बिठाते हुए सधारण सा जवाब दिया।
“हाँ , वहाँ सब ठीक हैं दी, मगर आप ही बहुत अच्छी नहीं लग रही ,,,,,आओ आप भी यहाँ बैठो” , अर्थ ने आन्या की तरफ देखकर मुस्कुरा कर कहा और फिर उसका हाथ पकड़ कर अपने पास ही बैठा लिया।
“हुम्म्म,,,,मैं बिलकुल ठीक हूँ ,,,,”, इसबार आन्या ने लम्बी सांस खींचते हुए कहा तो अर्थ बोला , “ठीक हो तो फिर इतना अजीब सी क्यों लग रही हो , तबियत ठीक नहीं हैं क्या ?, मैंने जैसे एक्सपेक्ट किया था वैसा रिएक्शन नहीं दिया आपने बिलकुल भी मुझे देखकर, मेरी वो आन्या दी कहा गयी हम्म “, अर्थ ने भोहे उचकाते हुए आन्या से पूछा।
“नहीं मैं सच में ठीक हूँ , तू चाहे तो मौसी से पूछ ले ,,,,”, आन्या ने थोड़ा झल्लाकर मौसी की तरफ देखते हुए कहा जो अर्थ के लिए पानी का गिलास लेकर आई थी।
आन्या को इतना परेशान सा देख अर्थ ने उसे सामान्य करने के लिए बात पलटते हुए कहा ,
“अरे! चिल दी , मैं मजाक कर रहा हूँ , ये कोई पहली बार नहीं जब मैं आपको चिड़ा रहा हूँ, पर आप इतना सीरियस क्यों हो गयी?,,,,, ,
मैं मौसी से क्यों पूछूंगा? आपने कहा ठीक हो, तो ठीक ही होंगी आप फिर”, अर्थ ने मुस्कुराकर कहा तो आन्या झेप गयी और चुपचाप उठ कर अपने कमरे में चली गयी।
“आन्या रुको, सुनो तो ,,,,,”, मौसी ने पुकारा मगर आन्या नहीं रुकी तो उन्होंने अर्थ की और देखा जो अभी भी बैठा आश्चर्य से आन्या को वहाँ से जाता हुआ देख रहा था।
फिर उसने पानी पिया और कुछ देर बाद मौसी से बोला , “मौसी क्या हो गया हैं दी को , ऐसे क्यों कर रही हैं , पहले तो ऐसे नहीं करती थी और ना मेरी बातों को दिल से लगाती थी,,,,, “
“तुम पहले ये बताओ चाय लोगे या ठंडा , फिर बातें करते हैं बैठ कर , ठीक “, श्रद्धा ने मुस्कुराकर कहा तो अर्थ भी मुस्कुरा कर बोला , “जी, मौसी , मैं चाय लूँगा। “
“ठीक हैं , आओ तुमको तुम्हारा कमरा दिखा देती हूँ , तुम भी फ्रेश हो जाओ, फिर मैं चाय बनाकर कमरे में ही लाती हूँ,,,,, “, श्रद्धा ने कहा और अर्थ को उसका कमरा दिखा कर रसोई में चली गयी।
थोड़ी देर बाद श्रद्धा चाय लेकर अर्थ के रूम में पहुँचती हैं।
“आओ अर्थ चाय पी लो,,,,”, अर्थ भी अब तक फ्रेश हो चुका था और मौसी की आवाज सुनकर वही कमरे में पड़ी कुर्सी पर बैठ जाता हैं। मौसी वही रखी मेज पर चाय रखती हैं और पास ही रखी दूसरी कुर्सी पर बैठ जाती हैं।
फिर एक चाय का कप अर्थ को पकड़ा देती हैं और दूसरा खुद ले लेती हैं।
अर्थ खामोशी से चाय पकड़कर पीने लगता हैं, मौसी भी शांत ही चाय पीने लगती हैं , कुछ देर कमरे में यू ही शांति बनी रहती हैं फिर अर्थ ही उस ख़ामोशी को तोड़ते हुए बोलता हैं। , “क्या हुआ मौसी सब इतना चुप क्यों हैं ? आप भी , दी भी ,,,,,सब ठीक तो हैं ना ?”
मौसी कुछ पल चुप रहती हैं फिर अर्थ की और देखते हुए बोलती हैं , “सब कुछ ठीक नहीं हैं अर्थ , मगर मुझे ये समझ नहीं आ रहा कि तुमको क्या और कैसे बताऊ,,,,,,,”
“मतलब ?”, मौसी की बात सुनकर अर्थ ने आश्चर्य से पूछा ……
“आन्या बहुत मुश्किल में हैं ,,,,,”,मौसी ने कहा तो अर्थ ने घबराकर अपना कप मेज पर रख दिया और फिर कुर्सी थोड़ा और नजदीक सरकाकर मौसी की तरफ देखते हुए धीरे से कहा , “कैसी मुश्किल मौसी , प्लीज आप साफ़ साफ़ बताइये ना , मुझे बहुत घबराहट हो रही हैं,,,,”
अर्थ कि बात सुनकर मौसी भी अपना कप मेज पर रख देती हैं और फिर अर्थ को देखते हुए बोलती हैं , “आन्या की जान खतरे में हैं अर्थ , शायद कोई उसे मारना चाहता हैं। “, इतना सुनकर ही अर्थ गुस्से से तिलमिला उठता हैं , “कौन हैं वो मौसी , जिसकी इतनी जुर्रत कि उसने मेरी दी की तरफ आँख उठाई ,,,,,”
“शांत हो जाओ अर्थ , पहले मेरी पूरी बात सुनो , मैं तुमको सबकुछ बताती हूँ शुरू से आखिर तक “, ये कहकर मौसी अर्थ को शुरू से लेकर आखिर तक सब कुछ बता देती हैं।
और ये भी बताती हैं कि आन्या इन्दर को प्यार करती हैं , मगर इन्दर मानव को अभी तक भी नहीं जानता और इन्दर ये भी नहीं जानता कि वो मानव ही था जिसने आन्या को उस दिन पार्किंग में बुलाया था, यहाँ तक कि पुलिस भी नहीं।
ये सब सुनकर अर्थ बहुत अधिक तनाव और गुस्से में आ जाता हैं , “इतना सब कुछ हो गया यहाँ , और हमको वहाँ कुछ पता भी नहीं , मुझे अभी बड़ी माँ से बात करनी पड़ेगी , हम कल ही जायेंगे यहाँ से……….” , अर्थ ये सब कहते हुए चिल्लाया और आन्या की माँ को बताने के लिए अपना फ़ोन उठता हैं तो श्रद्धा उसके हाथ से मोबाइल छीन लेती हैं और फिर अर्थ को बोलती हैं ,
“ये क्या करने जा रहे थे तुम ? इसमें आन्या की क्या गलती हैं ? बस यही ना कि वो इन्दर से प्यार करने लगी हैं………..अब बाकि मानव उसके पीछे क्यों पड़ा हैं या वो कौन है जो उसे मारना चाहता हैं और क्यों?………………………….इन सब में आन्या की क्या गलती हैं ?…..बोलो “
“गलती हैं मौसी , उन्होंने हमसे ये सब छुपाया ये गलती हैं , सबने कितने विश्वास के साथ भेजा था उनको यहाँ , और आपने भी उनका साथ दिया”, अर्थ ने नाराजगी जताते हुए कहा तो श्रद्धा उसे समझते हुए बोली , “देखो अर्थ , मानती हूँ तुम्हारा हमसे नाराज होना जायज हैं मगर फिर भी यही कहूँगी कि कुछ नहीं छुपाया उसने किसी से , बस हाँ , सब कुछ बताया नहीं उसने , मन साफ़ हैं उसका , बहुत भोली हैं वो……………………… इन्दर बहुत अच्छा लड़का हैं , और वो लोग खानदानी लोग हैं ऐसे ही सड़क चलता लड़का नहीं हैं वो……………………. रही बात दूसरी चीजों की तो पुलिस कर रही हैं ना जाँच…………………”
फिर थोड़ा रुकते हुए अर्थ को देखकर बोली , “मगर जबतक केस का समाधान नहीं होता , तब तक आन्या यहाँ से नहीं जा सकती……..”, मौसी ने यह कहा तो अर्थ मौसी की तरफ आश्चर्य से देखते हुए बोला , “क्या,,,या,,या,,,,,, मगर मैं उनको लेने आया हूँ , घर पर क्या कहूँगा मैं मौसी ?”
“मेरे हाथ में कुछ नहीं अर्थ , इंस्पेक्टर से मेरी काफी बहस हो चुकी हैं और आन्या को कम से कम यहाँ एक हफ्ता तो रुकना ही पड़ेगा , मुझे तुम्हारी मदद चाहिए अर्थ , कैसे भी घर पर कुछ बहाना बना दो कि तुम एक हफ्ता नहीं आ सकते , प्लीज………. मैं आन्या की जान खतरे में नहीं डाल सकती……….मुझे तुम्हारी मदद चाहिए अर्थ , हर तरह की मदद , जो भी तुम कर पाओ “, मौसी ने अर्थ की आँखों में लाचारी भरी नजरो से देखते हुए कहा तो अर्थ चुपचाप जाकर कुर्सी पर बैठ गया और अपनी आंखें बंद करके , अपना एक हाथ अपने माथे पर रखकर कुछ सोचने लगा।
“क्या सोच रहे हो अर्थ ? अब मुझे बस तुम्हारी ही मदद की आस है अर्थ , क्या तुम अपनी जान से प्यारी बहिन के लिए इतना भी नहीं करोगे , उसको मदद चाहिए तुम्हारी , आज तुम्हारी बहिन खतरे में हैं , वो बहिन जो तुमको राखी बांधती हैं और तुम हर साल उसकी रक्षा करने का वचन देते हो , क्या अब वो वचन पूरा नहीं करोगे ?”, मौसी ने अर्थ के पास वाली कुर्सी पर बैठते हुए कहा तो अर्थ ने अपना हाथ अपने सर पर से हटाकर , आँखें खोल कर मौसी की तरफ देखा , मगर उसकी खामोश आँखें कुछ ना कर पाने का जवाब दे रही थी।
“मुझे पता हैं अर्थ , इतना सब कुछ एकदम से पता चलना किसी के लिए भी शॉकिंग हो सकता हैं , तुम आराम से सब चीजों के बारे में सोचो और फिर अपना जवाब देना , मैं इन्तजार करुँगी , अभी मैं आन्या के पास जाती हूँ ,,,,,,”, कहकर मौसी उठ कर वहाँ से आन्या के पास चली जाती हैं।
उधर आन्या गुमसुम सी अपने कमरे की बालकनी में खड़ी थी। दरवाजा खुलने की आवाज सुनकर पलटकर देखती है तो मौसी को देखकर एक मुस्कराहट देती हैं और फिर पूछती हैं , “बता आई आप सब कुछ अर्थ को ? और उसका जवाब भी मैं आपको बता सकती हूँ ,,,,,, इंकार कर दिया ना उसने ,,,,,,”, आन्या ने हल्का सा व्यंगात्मक मुस्कान के साथ कहा।
“हम्म, पर मुझे पूरा विश्वास हैं वो हमारी मदद जरूर करेगा , वो बहुत प्यार करता हैं तुमसे , मगर उसे अभी थोड़ा टाइम दो , अचानक से उसे इतना कुछ पता चला तो वो भी एकदम से क्या जवाब दे ?,,,,,,, “, आन्या की बातें सुनकर मौसी ने अपना तर्क रखा जोकि विशवास से भरा हुआ था।
मौसी की यह बात सुनकर आन्या मौसी के गले लग जाती हैं , “काश! सब जल्दी ठीक हो जाये मौसी …….”
कुछ देर दोनों शांत रहते हैं फिर मौसी उसे सामान्य करते हुए पूछती हैं ,
“और भई कल की क्या तैयारी चल रही हैं ये तो बता दो ,,,,,,, क्या पहनेगी मेरी लाड़ली? ऐसा कुछ पहनना की इन्दर बस देखता रह जाये,,,,,”, मौसी ने हसकर आन्या को छेड़ते हुए कहा, “और हाँ ,रवि का कॉल आया था , कलर कोड रेड हैं पार्टी का ……..देखो तो प्यार का रंग रखा हैं , लाल , दो प्यार करने वालो के लिए …..”,कहकर मौसी मुस्कुराई।
“रेड साड़ी हैं मेरे पास एक , काकी ने आते आते रख दी थी ऐसे ही , वो ही पहन लूँगी मौसी…….”, आन्या ने थोड़ा सोचकर मौसी से बोला।
“अरे वाह, दिखा तो ?”, मौसी ने आन्या से कहा तो वो मुस्कुराकर अपनी अलमारी से वो साड़ी निकाल लायी। आन्या बहुत खुश और एक्साइटेड लग रही थी और एक पल में ही अपनी परेशानियों को भूल चुकी थी।
“ये तो बहुत सुन्दर हैं,,,,,हाँ ये फाइनल , ये ही पहनना तू ,,,,,, मैचिंग ज्वेलरी मैं दे दूंगी , प्यारी सी लगेगी मेरी आन्या इसमें……….देखना इन्दर तो बस देखता ही रह जायेगा तुझे………”, मौसी ने आन्या का चेहरा ऊँगली से उठाकर छेड़ते हुए कहा तो आन्या शरमा गयी।
तभी दरवाजा खुलने की आवाज हुई , तो दोनों ने दरवाजे की ओर देखा।
“अर्थ तुम , आओ ,,,,”, मौसी ने दरवाजे पर खड़े अर्थ को देखते हुए कहा। तो अर्थ एक पलक आन्या को देखने लगा जो किसी भी बेउम्मीदी के साथ , बिना अर्थ को देखे , अपनी साड़ी वापिस अपनी अलमारी में रखने चली गयी थी।
अर्थ अंदर आता हैं और बिना कुछ कहे सीधे आन्या के पीछे जाकर खड़ा हो जाता हैं। आन्या अलमारी बंद करके पलटती हैं तो अर्थ से टकराते टकराते बचती हैं , फिर उसे सॉरी बोलकर बराबर से जाने लगती हैं तो अर्थ उसका हाथ पकड़कर रोक लेता हैं, “रुको दी ….”
“कहाँ की तैयारी कर रही हो दी ? मुझे नहीं ले जाओगी साथ ? मुझे भी तो मिलना हैं अपने जीजू से……..”, अर्थ ने आन्या के सामने आकर खड़े होकर उसकी तरफ देखते हुए कहा तो आन्या ने आश्चर्य से एकदम से अपना चेहरा उठाकर पहले अर्थ को देखा फिर मौसी को, जैसे उसे तो यह सुनने की कोई उम्मीद ही नहीं थी।
“मैं सही बोल रहा हूँ दी , मैं आपके साथ हूँ , मेरे होते आपको कुछ नहीं होने दूंगा मैं , और उस मानव को तो मैं छोडूंगा नहीं , उसकी इतनी हिम्मत ,,,,,आप प्लीज बिलकुल परेशान मत हो, आपका ये भाई हमेशा आपके साथ हैं ,,,,,”, ये कहकर अर्थ ने भरी आँखों से आन्या को अपने सीने से लगा लिया तो आन्या भी उसके सीने से लगकर रोने लगी।। दोनों की ही आँखें बुरी तरह भर आई थी।
दोनों का ऐसा प्यार देखकर अब तक मौसी की आँखों में भी नमी आ गयी थी।
अब अर्थ भी मौसी और आन्या के साथ पार्टी में शामिल होने के लिए तैयार हो गया था , वो आन्या के लिए बहुत खुश था और इन्दर से भी मिलना चाहता था। मगर उन तीनो में से किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि एक मानव नाम की आफत वही पार्टी में उन सबको मिलने वाली हैं।
और जिसके बाद आन्या की तकदीर एक बार फिर पता नहीं क्या ही मोड़ ले लेगी।
क्रमशः
रूचि जैन
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