सफर आसान नहीं मुहोब्बत का
सितम करने वाले लाखों मिल जाते हैं……
आन्या का घर (मोहाली)
“शाम के ७ बज गए हैं , अभी तक संध्या दीप नहीं जला ? कहा है ये दोनों।”, आन्या की दादी मंदिर से निकलते हुए बुदबुदाई।
“बड़ी बहु , छोटी बहु “, दादी ने आवाज लगायी तो आन्या की माँ रसोई से निकलते हुए थोड़ा भागती हुई दादी के पास आई , “जी माँ जी “
“संध्या दीप क्यों नहीं जला अभी तक ? और ये छोटी बहु कहाँ हैं ? “, दादी ने चारो और निगाहे दौड़ाते हुए आन्या की माँ से सवाल किया।
“हम यहाँ हैं माँ जी, माफ़ कीजिये , बस अभी जला ही रहे थे दीप “, अपने कमरे से आते हुए आन्या की चाची सुनैना बोल पड़ी।
फिर सभी लोग मदिर में उपस्थित हो जाते हैं , दीप प्रवज्जलित होता हैं और शाम की आरती के बाद सभी हॉल में इकठ्ठा होते हैं।
“आन्या कब आ रही हैं , कुछ बात हुई श्रद्धा से ?”, आन्या के पिता पुरुषोत्तम जी ने सोफे पर बैठते हुए आन्या की माँ साध्वी से सवाल किया।
दादी भी आकर पुरुषोत्तम के नजदीक ही बैठने लगती हैं।
“आइये माँ बैठिये ,,,,”, पुरुषोत्तम जी ने थोड़ा सरकते हुए कहा तो दादी मुस्कुराते हुए बैठ जाती हैं।
“हाँ , मैंने बोला हैं श्रद्धा को कि अर्थ आ जायेगा आन्या को लेने, वो तो अभी मना ही कर रही थी मगर मैंने बोल दिया कि अब आन्या के बाऊजी और ज्यादा रुकने के लिए मना कर रहे हैं तो फिर उसने कुछ नहीं कहा। “, आन्या की माँ साध्वी वही पास खड़े खड़े बोली।
“हम्म , अच्छा किया। कल चला जायेगा अर्थ वहाँ, और आप श्रद्धा को बता देना अर्थ के आने के बारे में। “, पुरुषोत्तम जी ने साध्वी की ओर देखते हुए कहा तो साध्वी जी ने हाँ में अपना सर हिलाया और फिर वो उठ कर अपने कमरे में चले गए।
“अर्थ कहा हैं , आज आरती में भी नहीं आया ?”, दादी ने साध्वी की ओर देखते हुए पूछा। तभी अर्थ वहाँ पहुंच जाता हैं और दादी के पास आकर बैठते हुए अपनी दोनों बाँहों का हार बनाकर दादी के गले में डाल देता हैं , “ओफ़्फ़्फ़ो प्यारी दादी , ऐसा भला कैसे हो सकता हैं कि आप मुझे याद करे और मैं न आउ”, अर्थ ने दादी को थोड़ा मक्खन लगते हुए कहाँ तो दादी ने अर्थ का कान पकड़ लिया , “रुक अभी बताती हूँ नालायक—-“
“आउच,,,च,,,,,आह्ह दुखता हैं दादी , प्लीज छोड़ो ना मेरी प्यारी दादी ,,,,, “, अर्थ ने दादी के कान पकडे पकडे ही पास से उठ कर उनके पैरो के पास नीचे बैठते हुए मुस्कुराकर कहा।
“सुधर जा नालायक, सब जानती हूँ मैं , आज संध्या आरती में नहीं आया इसीलिए मक्खन लगा रहा हैं दादी को , हम्म “, दादी ने अर्थ का कान छोड़ते हुए उसके सर पर एक हल्का सा चपत लगाते हुए कहा तो अर्थ मुस्कुराया।
” अरे कन्हैया जी से अच्छी सी बीवी मिलने के लिए ही प्रार्थना कर लिया कर “, साध्वी जी अर्थ को देखकर मुस्कुराते हुए बोली।
“वो तो इसको वैसे भी मिल जाएगी , इतना अच्छा और संस्कारी जो है मेरा बच्चा , नजर ना लगे किसी की”, दादी ने बहुत प्यार से अपना हाथ अर्थ के गाल पर फिरते हुए उसकी बलइया उतारते हुए कहा।
“हम्म ये तो हैं माँ , हमारे घर के तो सारे बच्चे ही बहुत संस्कारी हैं और ये सब आपके दिए संस्कार ही तो हैं। बस अब आन्या आ जाये तो उसकी शादी के बारे में भी ,,,,,,,,,”, आन्या की चाची सुनैना की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि दादी बीच में ही बोल पड़ी , “सुनैना , आन्या जब तक नहीं चाहेगी उससे शादी के बारे में कोई बात नहीं करेगा , हमने अपनी घर में बेटो के साथ साथ बेटियों को भी खुलकर जीने की आजादी दी हैं , हाँ वो बात अलग हैं कि हमने कभी आधुनिकता को अपने बच्चो के संस्कारो के आड़े नहीं आने दिया। “
“जी माँ जी”, कहकर सुनैना ने दादी की बातों पर सहमति जताई।
“कनहैया जी की कृपा , अब तक हमारे परिवार पर रही हैं और आगे भी ऐसे ही बनी रहेगी “, दादी ने हाथ जोड़ते हुए कहा और फिर अर्थ से बोली , “अर्थ कल तू आन्या को लेने मनाली जा रहा हैं। तेरे बाऊजी भी यही चाहते हैं। “
“जी दादी , मैं जाने कि तैयारी करता हूँ “, अर्थ ने कहा और फिर अपने कमरे में चला गया।
“जाओ सुनैना बहु , अर्थ की जाने की तैयारी करवा दो “, कहकर दादी भी अपने कमरे में चली गई।
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मनाली होटल
रात के १० बजे हैं और इधर रवि , मीता और आलिया के कमरे में पहुँचता हैं। संध्या वहाँ पहले से ही बैठी थी। कमरे में घुसते ही रवि ने सवाल किया , “हाँ! क्यों बुलाया मुझे , जल्दी बोलो,,,,,,”
“श,,,,श,शश,,,,,,,श,,,,,,, आ जाओ आ जाओ , दरवाजा अच्छे से लॉक कर देना रवि , कभी भाई आ जाये “, संध्या ने रवि को हल्का बोलने का इशारा करते हुए कहा।
“अरे! अब क्या हुआ , तुम लोग ऐसे हल्के हल्के क्यों बोल रही हो और मुझे क्यों बुलाया हैं “, रवि ने अंदर आकर खीजते हुए कहा तो संध्या आराम से पलंग से उतर कर रवि के पास गयी और धीरे से बोली , “तुम भूल गए क्या? भाई के जन्मदिन की सरप्राइज पार्टी की तैयारी भी तो करनी हैं “, ये सुनकर रवि जोर जोर से हसने लगा , “हा हा हा, तुम लड़कियों का कॉमन सेंस भी ना ,,,,,,,”
“क्या कॉमन सेंस ? हम्म “, इस बार मीता पलंग से फुंकारती हुई उतरी ।
“अरे कुछ नहीं , मैं तो बस ये सोच रहा था कि जब इन्दर को पहले से ही अपने जन्मदिन की पार्टी के बारे में पता हैं तो इसमें सरप्राइज वाली क्या बात रह गयी, हैं , हा हा हा, तभी तो उसने मानव और धीरज को भी आमंत्रित किया, वरना क्यों करता ?”, रवि ने हॅसते हुए कहा।
“हाँ हाँ पता हैं कि इन्दर को जन्मदिन की पार्टी के बारे में पता हैं मगर, ये तो नहीं पता ना कि हम उस पार्टी को कैसे अंजाम देंगे, कौन क्या करेगा और क्या क्या होगा उस पार्टी में —-बोलो , समझे कुछ या नहीं”, मीता ने रवि की बात का तुरंत रिप्लाई दिया तो रवि चुपचाप जाकर सबके पास ही एक स्टूल पर बैठ गया और बोला , “हम्म , ठीक है , ठीक है , तो फिर अब बताओ , करना क्या हैं ?”
और फिर चारो मिलकर पार्टी की तैयारियां करने लगते हैं। इसके लिए वो होटल के ही पार्टी हॉल को ही चुनते हैं जिसका एक बड़ा टेरस भी था।
साथ ही साथ पार्टी का ड्रेस कोड लाल रंग रखा जाता हैं और कुछ मजेदार गेम भी रखे जाते हैं।
इधर ये लोग पार्टी की तैयारी कर रहे थे तो उधर धीरज अपनी पूरी नजर पुलिस पर बनाये हुए था और साथ ही साथ मानव भी मन ही मन अलग ही खिचड़ी पका रहा था , उसके मन में भी कुछ ना कुछ तो खुराफात चल रही थी ये तो पक्का था।
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अगले दिन आन्या के मौसा जी को ऑफिस के जरुरी काम से एक हफ्ते के लिए कही बाहर जाना पड़ता हैं। मौसी ने उनको अभी तक सारी बातें नहीं बताई थी।
इधर अर्थ मनाली के लिए रवाना हो चुका था। वो इस बात से बिलकुल अनजान था कि मनाली में आन्या के साथ क्या खिचड़ी पक रही हैं।
इंस्पेक्टर की छानबीन भी अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची थी , उसकी अपनी ही इन्वेस्टीगेशन चल रही थी मगर कोई सफलता नहीं मिल रही थी। अब तक इंस्पेक्टर भी काफी परेशान हो चुका था क्योकि उसके पास उस स्केच के अलावा और कोई सबूत नहीं था और वो स्केच वाला आदमी उनको पूरे मनाली में कही नहीं मिला था । उस आदमी को ना तो किसी ने देखा था, और ना कोई उसको पहचानता था। वो इंसान अचानक कहा से आया और कहा गायब हो गया , किसी को कुछ पता नहीं था ….
आखिरकार परेशान होकर इंस्पेक्टर चुपचाप एक सर्च ऑपरेशन इनिशिएट करता हैं और भेष बदलकर इन्दर , आन्या या अन्य किसी भी इस केस से जुड़े व्यक्ति पर पूरी नजर रखने के लिए एक टीम तैयार करता हैं। जिसका मेन लीडर इंस्पेक्टर विक्रम को बनाया जाता हैं जिनको इनमें से कोई भी नहीं पहचानता था।
इस केस के सिलसिले में इंस्पेक्टर का १-२ बार आन्या के घर आना होता हैं जिस बीच उसको मालूम पड़ता हैं कि अब अन्या वहाँ से जाने की तैयारियां कर रही हैं तो वो उसे मनाली छोड़ कर ना जाने के लिए आगाह करता हैं।
मौसी जो कि इन सब चीजों से पहले से ही काफी परेशान हो चुकी थी, उनकी इंस्पेक्टर से गरमागरम बहस हो जाती हैं और आख़िरकार ये तय होता हैं कि आन्या अभी एक हफ्ता मनाली छोड़ कर कही नहीं जाएगी। इस केस में बहस करने का कोई चारा भी नहीं था और ना ही मौसी चाहती थी जी केस मनाली से मोहाली ट्रांसफर हो , इसीलिए उन्होंने इंस्पेक्टर की बात मानना ही सही समझा ….
पर अब मौसी के आगे एक नई समस्या आ गयी थी कि अर्थ को एक हफ्ता मनाली में कैसे रोके क्युकी वो तो पहले ही मोहाली से निकल चुका था। खैर उन्होंने भी सोच लिया था कि अब इसका बस एक ही समाधान है और वो ये की अर्थ को सब कुछ बता कर अपने फेवर में ही करना ….
हलाकि ये आन्या के लिए रिस्की भी हो सकता था मगर वो कहते है ना कि एक झूट को छुपाने के लिए १०० झूट बोलने से अच्छा है कि एक सच का ही डट कर सामना कर लो…. अब जो होगा देखा जायेगा……
इधर आन्या भी पूरे मन से इन्दर के जन्मदिन की तैयारियां कर रही थी। वो मन ही मन यही सोच रही थी कि ऐसा क्या गिफ्ट दू इन्दर को जो उसे हमेशा याद रहे…. उसे बार बार इन्दर की कही बातें याद आ रही थी,” इस बार गिफ्ट मेरे लिए एक सरप्राइज होना चाहिए जो मुझे जिंदगी भर याद रहे….”
“इन्दर मैं तुमको ऐसा सरप्राइज दूंगी जो तुम वाकई नहीं भूलोगे”, आन्या ने मन ही मन सोचा…..
“आप चाहते थे ना मुझसे वो ३ लफ्ज सुनना…. अब आपका इन्तजार ख़तम होने वाला है माय स्वीटहार्ट, बस एक दिन , बस एक दिन और फिर मेरे प्यार का इजहार मेरे लबो पर होगा और आपकी आन्या हमेशा के लिए आपकी हो जाएगी , सिर्फ आपकी “, मन ही मन आन्या सोचकर मुस्कुराई……
“दिल की बात जुबा पर ले आएंगे हम
तेरे दिल में हमेशा के लिए बस जायेंगे हम
करने दो जो सितम करना चाहती हैं दुनिया
तुम्हारी मुहोब्बत में खो जायेंगे हम…..🥰🤗
क्रमशः
रूचि जैन
🤩🤩 likes and comments ki prateeksha rahegi…..🥰 😉😉😁🥰