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तेरे जैसा प्यार कहाँ part – 14

“तू प्यार नहीं मेरा, तो अब तू मेरी नफरत भी नहीं ,
तुझे पाना तो बस मेरी जिद, और मेरी जिंदगी का जूनून हैII

आर्य मेंशन, मोहाली

मानव की माँ आरती लॉबी में सोफे पर बैठी हुई है मगर उनका ध्यान कही और ही है और पिता प्रकाश वही पास में बैठे किसी क्लाइंट से फ़ोन पर बात कर रहे है।
कॉल ख़तम होने पर मिस्टर प्रकाश आरती को यूँ शांत बैठा देख कर उनके नजदीक आकर बैठ जाते है और उसके हाथो पर अपना हाथ रखते हुए।
प्रकाश – कहाँ खोई हो आरती। अब बस भी करो भूल जाओ सब बातें।  ये सब हमारे हाथ में नहीं था। जो हुआ सो हुआ।  अब अगर तुम इस बात को नहीं समझोगी तो तुम्हारा बेटा कैसे समझेगा — बोलो ?
आरती (गुस्से से प्रकाश की तरफ देखती है और अपना हाथ खींचते हुए ) – “आपको फर्क नहीं पड़ता मगर मुझे पड़ता है।  कितनी रेपुटेशन थी हमारी।  मगर उन्होंने एक बार भी नहीं सोचा।  जिन जिन को मानव के रिश्ते के बारे में पता था वो मजाक बनाते है पीठ पीछे।  बहुत गलत किया पुरुषोत्तम जी ने हमारे साथ , आखिर ऐसा भी क्या गलत हो गया था ?”
प्रकाश – “ये तुम कह रही हो। ये सब उनकी नहीं तुम्हारे बेटे की गलती है। उनकी जगह कोई और होता तो वो भी यही करता। “
आरती – अरे ! ऐसा भी क्या कर दिया मेरे बेटे ने , आजकल के टाइम में गर्लफ्रेंड होना कौन सी बड़ी बात है।  बहुतो की होती है शादी से पहले। मगर बीवी तो नहीं थी न।  शादी हो जाती तो सब ठीक हो जाता , मेरा बेटा कौनसा उससे मिलने जा रहा था ?”
प्रकाश – “आरती माना तुम बहुत खुले विचारो की हो , मगर जो बात तुम्हारे लिए छोटी सी थी वो उनके लिए शायद बहुत बड़ी थी।  अगर हमारी दिया के साथ ये सब हुआ होता तो तब भी तुम ऐसा ही बोलती क्या ? तुम्हारी ये खुदगर्जी और सोच एक दिन तुम्हे और तुम्हारे बेटे दोनों को ही न ले डूबे।  सोचना इस बारे में कुछ —“
कहकर प्रकाश वहाँ से उठ कर चले जाते है।

आरती (मन ही मन प्रकाश को देख़ते हुए ) – “आप भले ही भूल जाओ मगर मैं नहीं भूल सकती अपने बच्चे की वो हालत। मैं नहीं भूल सकती वो २ महीने , मैंने और मेरे बेटे ने क्या नहीं सहा सिर्फ और सिर्फ उस परिवार की वजह से , नफरत है मुझे उनसे, कभी नहीं भूल सकती मैं —- इतना अपमान वो भी आरती आर्य का , ये अच्छा नहीं हुआ —“
सोचते सोचते वो २ महीने पहले की यादो में पहुंच जाती है।

फ्लैशबैक (२ महीने पहले)

आरती आर्य अपने बेटे मानव के रिश्ते को लेकर बहुत खुश थी और अपने खास मिलने जुलने वालो को फ़ोन पर यह खुशखबरी दे ही रही थी की तभी उनके पास चन्द्रिका का फ़ोन आ जाता है।
चन्द्रिका – “माफ़ कीजियेगा मालकिन , मगर पुरुषोत्तम जी ने आपके लिए ये सूचना भिजवाई है कि अब ये शादी हो नहीं पायेगी।  रिश्ता तोड़ दिया है उन्होंने। “
सुनकर तो जैसे आरती आर्य के पैरो तले जमीन ही सरक गयी हो।
आरती – “ये क्या बकवास कर रही हो तुम , वो ऐसा कैसे कर सकते है। वजह क्या है इस सब की “
चन्द्रिका – जी वो बता रहे थे के मानव किसी और को पसंद करता है और उससे मिलता भी है।
आरती (थोड़ा चिल्लाते हुए ) – “क्या ?, ये क्या बोल रही हो तुम ?”
चन्द्रिका – आप चाहो तो मानव बेटा जी से ही पूछ लो सब कुछ , मैं फ़ोन रखती हूँ , मुझे तो ये बात आपसे बोलने के लिए कहाँ गया था सो मैंने कह दी।
कहकर चन्द्रिका फ़ोन रख देती है।
आरती मानव की तरफ देखते हुए , “ये क्या सुन रहे है हम मानव , कौन है वो लड़की जिससे तुम मिलते हो ?”
मानव – “कौन लड़की मॉम, कोई भी तो नहीं है। आप तो मुझे जानती है न मेरे कितने फ्रेंड्स है –“
मिस्टर प्रकाश आरती को देखते हुए ,”आखिर बात क्या है ? क्या कहाँ चन्द्रिका ने ?”
“रिश्ता तोड़ दिया उन लोगो ने “, कहकर आरती निःशब्द सी सोफे पर बैठ जाती है।
“व्हाट ?”, मानव चिल्लाते हुए।
प्रकाश – ये तो होना ही था , देख लिया हद से ज्यादा छूट देने और बिगाड़ने का नतीजा।
“मैं ऐसा हरगिज नहीं होने दूंगा डैड –मैं सब कुछ ठीक कर दूंगा। “, कहते हुए मानव घर से बाहर निकल जाता है।
मानव अपने दोस्त धीरज को कॉल करता है , उससे कुछ देर बात करता रहता है फिर बोलता है  , “सुन मुझे आन्या के कॉलेज के बाहर मिल। ” और गाड़ी स्टार्ट करके वहां से निकल जाता है।

कुछ देर बाद वो लोग आन्या के कॉलेज के बाहर थे।

मानव – तुझे पक्का पता है आन्या आज कॉलेज आई है ?
धीरज – हाँ , पता करवाया है मैंने। कॉलेज खतम होने वाला है बस आती ही होगी बाहर। मगर तू करना क्या चाहता है मानव।
मानव – सारी बातें क्लियर
धीरज – उससे क्या होगा ? रिश्ता तो उसके बाउजी ने तोडा है न।
मानव  – हाँ मगर , पहले एक बार उससे तो बात कर लू , सब क्लियर कर दू , फिर डैड उसके बाउजी से बात कर लेंगे।

तभी उनको दूर से आन्या आती हुई दिखी , उसके साथ दीप्ति और अनु भी थी।
मानव को देखकर वो लोग ठिठक कर रुक जाती है।
दीप्ति – “आप यहाँ ? अब क्या करने आये है यहाँ ? आपसे अब कोई वास्ता नहीं आन्या का “
मानव – मुझे बात करनी है उससे , जैसा तुम लोगो ने समझा वैसा नहीं है।
अनु – उससे क्या फर्क पड़ता है , अर्थ ने अपने आँखों से देखा है सब।
मानव – मगर एक बार मेरी बात तो सुन लो।
आन्या (धीरे से )- बोलिये क्या बोलना चाहते है आप ?
मानव – देखो आन्या ! रिया मेरी सिर्फ दोस्त है , हाँ वो मुझे पसंद करती है मगर मैं उसको प्यार नहीं करता। मैं सिर्फ तुमसे शादी करना चाहता हूँ और वादा करता हूँ आज के बाद रिया से मिलूंगा भी नहीं।
अनु (ताली बजाते हुए ) – वाह वाह  बहुत खूब , कितने दूध के धुले हुए हो आप। आन्या इतनी बेवकूफ लगती है क्या आपको जो उसको गर्लफ्रेंड , बॉयफ्रेंड का मतलब समझ न आता हो। चले जाओ यहाँ से , आन्या तुम जैसे लड़के से कभी शादी नहीं करेगी, जो लड़कियों को सिर्फ धोखा देना जानता हो ।
अनु की तरफ देख कर – “मुझ जैसा लड़का , हम्म, तुमने अभी मुझे जाना ही कहाँ है—- “
मानव को ये बेइज्जती बर्दास्त नहीं होती।
मानव (गुस्से में आन्या का बाजू पकड़कर )- मैं उससे नहीं तुम से बात कर रहा हूँ आन्या।
आन्या (खुद को छुड़ाते हुए ) – छोड़ो मेरा हाथ।  मेरे बाउजी ने जो कह दिया वो मेरे लिए पत्थर की लकीर है।  चले जाओ यहाँ से मुझे कुछ नहीं सुनना।
मगर मानव आन्या का बाजू नहीं छोड़ता।,  “तुमको सुनना ही पड़ेगा समझी तुम”
ये सब देखकर आस पास और लड़के लड़किया इकठा होने लगते है।
आन्या (खुद को छुड़ाते हुए )  – मैंने बोला छोड़ो मुझे
मानव (आन्या की आँखों में घूरते हुए बत्तमीजी से)- “और अगर न छोड़ू तो —“
आन्या जोर देकर खुद का बाजू छुड़ा लेती है और एक जोरदार थप्पड़ मानव को रसीद कर देती है।
“मुझे नहीं पता था की तुम इतने बत्तमीज भी हो , दुबारा मुझसे मिलना भी मत, समझे “, कहकर वहाँ से चली जाती है।

सबके सामने अपने गाल पर पड़े थप्पड़ और आन्या की बातों को महसूस कर मानव की आँखों में खून उतर आता है।
वो गुस्से में धीरज को वही छोड़ उलटे पैर आर्य मेंशन लौट आता है और पैर पटकता हुआ अपने रूम में चला जाता है और वहाँ जाकर अपने कमरे की चीजों को गुस्से में इधर उधर फैकने लगता है।
तभी उसके हाथ आन्या का फोटो आ जाता है। कुछ देर तक फोटो को घूरता रहता है फिर अपने गाल को सहलाते हुए  “तुमने आज अच्छा नहीं किया आन्या , तुम जानती नहीं तुमने किससे पन्गा ले लिया है …”, फिर उसकी  फोटो अपनी जेब में रखकर घर से बाहर निकल जाता है।
अपने दोस्त धीरज को कॉल मिलता है और एक रेस्टोबार पर मिलने के लिए बोलता है। 
शाम का समय है, गाड़ी की रफ़्तार बहुत तेज है , न जाने कितने रोड स्टाल और ठेलो को उड़ाती गाड़ी एक रेस्टोबार के आगे रूकती है।
धीरज वही खड़ा उसका वेट कर रहा था। मानव बिना कुछ बोले बार में घुस जाता है।
धीरज (पीछे पीछे ) – क्या हुआ मानव ? ? अरे सुन तो —-
मानव (अंदर पहुंच कर काउंटर पर बैठते हुए ) – “२ पेग बना जल्दी , व्हिस्की “
धीरज (पीछे पीछे वही आ जाता है )- सुन मेरी बात मानव, जाने दे , इतना गुस्सा ठीक नहीं दोस्त 
मानव (गुस्से में ) – उस आन्या ने मुझे —- —-हाथ जोर से टेबल पर मारता है और पेग उठा कर एक घूँट में पी जाता है।
धीरज -, “मानव सुन जाने दे न , तुझे क्या कमी, बहुत लड़किया है जो मरती है तुझपर “
मानव – (२ पेग एक सांस में और पीते हुए ) आजतक कोई लड़की ऐसी नहीं हुई जिसने मानव आर्य को ना  कहाँ हो। और इसने –(उंगली दिखते हुए ) इसने मुझे —
(२ पेग एक सांस में और पीते हुए ) मानव आर्य का दिल जब एक बार किसी पर आ गया तो बस आ गया। समझा तू —
आन्या के फोटो को जेब से निकालकर घूरते हुए उस पर अपना हाथ फेरता है ।।।
“तुम मेरी हो आन्या सिर्फ मेरी—-मानव आर्य की।।।।  मानव आर्य ने जब जब कोई चीज को शिद्दत से चाहा हैं —- तो उसे पाया भी है “,
उस वक़्त मानव की आँखों से एक अजीब बदले की ज्वाला निकल रही थी।
धीरज – तू पागल हो गया है क्या ? चल घर तूने बहुत पी रखी है।
“चल हट” , नशे में धीरज को धक्का देते हुए।
धीरज किसी तरह उसको लेकर आर्य मेंशन पहुँचता है। और उसे उसके कमरे में लिटा आता है और आरती को सब बातें बताता है।
आरती मानव की ये हालत देखकर दंग रह जाती है।

अगली सुबह –

आरती गर्म पानी का गिलास मानव के कमरे में भिजवाती है और खुद भी उसके सिरहाने जाकर बैठ जाती है।
हलके हलके उसके बालो को सहलाते हुए – “मानव— “
मानव (लेटे लेटे अपनी माँ के लिपटते हुए ) – “गुड मॉर्निंग मॉम ‘
आरती (गिलास उसकी और बढ़ाते हुए) – ये लो पानी पी लो। हो सकता है रात का नशा उतर जाये।
मानव (बैठते हुए ) – “सॉरी मॉम “
आरती – “ये सब क्या है मानव , धीरज बता रहा था कि—- कहाँ है वो फोटो , मुझे दो। “
मानव कोई जवाब नहीं देता।
आरती – “भूल जाओ उसे मानव , हम उससे भी खूबसूरत और अच्छी लड़की ढूढ़कर लाएंगे तुम्हारे लिए “
मानव – “आप भूल सकती है मॉम– जो कुछ भी हुआ”
आरती (उठकर खिड़की के पास खड़ी होकर ) – “नहीं , कभी नहीं, इतनी बेइजत्ती हमने कभी नहीं सही “
मानव – “फिर मैं कैसे भूल जाऊ मॉम “
आरती – “मेरे गुस्से और तुम्हारी जिद में फर्क है मानव, मैं नहीं चाहती की तुम्हारी जिद तुमको बर्बाद कर दे। और वैसे भी वो लड़की अब इस घर की बहु नहीं बन सकती।  समझे तुम “
मानव – “तो अब आप भी ये जान लीजिये माँ , अब आन्या मेरी जिद नहीं मेरा जूनून है। जिसके लिए मैं किसी भी हद तक जा सकता हूँ। “
आरती – “मगर बेटा सुनो —“
मगर मानव बिना कुछ सुने वहाँ से चला जाता है।

उधर उस दिन के बाद से आन्या ने कॉलेज जाना बंद कर दिया था और खुद को घर में बंद कर लिया था … कोई समझ ही नहीं पा रहा था की अचानक ऐसा क्या हो गया …. दीप्ति और अनु ने भी आन्या के कहने पर अपने मुँह पर ताला लगा लिया था….
इधर मानव का गुस्सा और उसका जूनून दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा था।
आरती जानती थी कि जो भी हुआ वो आगे चल कर कुछ भी समस्या खडी कर सकता हैं ।  मानव बहुत गुस्सेबाज और जिद्दी था इसीलिए उसे डर था कि मानव कही खुद को बर्बाद न कर ले और वही हुआ—-
ऊपर से तो वो यही दिखाता था कि अब सब ठीक है मगर अंदर ही अंदर उसके अंदर कोई आग दिन पर दिन सुलग रही थी। रोज रात को, वैसी ही बुरी हालत में धीरज उसको घर छोड़ जाता था और उसे देखकर आरती के सीने पर सांप लौट जाते थे।
इन २ महीनो में उसने रिया और बाकि दोस्तों से भी किनारा कर लिया था और धीरज से उसने आन्या के बारे में हर मुमकिन जानकारी पता लगवा ली थी। मगर चाह कर भी उससे मिल नहीं पा रहा था।  तभी उसे आन्या के मनाली जाने का पता चला।
मनाली में मानव की अपनी खुद कि प्रॉपर्टी (फार्महाउस) तो थी ही बस अपने घर पर ये बोलकर कि वो हवा बदलाव के लिए कुछ दिन मनाली जाना चाहता है, आन्या के पीछे पीछे ही मनाली पहुंच गया। और इस बात की मानव के पेरेंट्स को कानो कान खबर भी नहीं थी।  आरती तो बल्कि काफी खुश थी मानव के मोहाली से थोड़ा दूर जाने पर। मगर उसे क्या पता था कि वो मानव को जिससे दूर भेजना चाहती है , मानव उसी के लिए मनाली पहुंच चुका था ….

वर्तमान –

“क्या सोच रही हो आरती ?”, मिस्टर  प्रकाश की आवाज ने आरती का धयान तोड़ा।
“जी , कुछ नहीं , बस मानव की याद आ गयी। “, आरती ने मुस्कुराते हुए कहा।
“कहा है वो , कब तक आएगा , कुछ बात भी हुई उससे ? यहाँ का बिज़नेस ज्वाइन नहीं करना क्या उसको ?”, प्रकाश ने सोफे पर बैठते हुए कहा।
“हाँ हाँ कर लेगा , पहले उसे संभल तो जाने दीजिये , मैं बात करुँगी उससे “, कहकर आरती प्रकाश को थोड़ा टाइम के लिए टाल देती है।
मगर उसको खुद ही नहीं पता था कि मनाली में चल क्या रहा है। वो तो अब मानव की तरफ से सब कुछ सही होता ही समझ रही थी।

*******

मनाली –

आज काफी सर्द मौसम था।  रात हुई बारिश के कारण हवा में भी ठंडक थी।  चारो तरफ फैली हरियाली और उस पर पड़ी बूंदे वहाँ की खूबसूरती को और भी बढ़ा रही थी।
आज की सुबह आन्या की जिंदगी में एक अलग ही महक लेके आई थी। आन्या सुबह ही अच्छे से तैयार होकर कैफे पहुंच गयी थी। वाइट कलर की बॉडीकॉन ड्रेस और उस पर ब्लैक लॉन्ग कोट एंड बूट्स , कर्ली बाल , आज तो उसके अंदाज ही बहुत खूबसूरत थे। आज का दिन उसके लिए बहुत खास था। आज उसके चेहरे पर अलग ही चमक थी , ऐसा लगता था जैसे मौसम की खुमारी उसके दिल के अंदर तक उतर आई हो। दिल गाने गुनगुना रहा था और होंठों पर एक प्यारी सी मुस्कान रह रह कर आ जा रही थी।
वो बहुत बेसब्री के साथ इन्दर का इंतजार कर रही थी।
काउंटर पर बैठी इन्दर के ख़यालों में खोई हुई ही थी की तभी किसी की आवाज ने उसका ध्यान खींचा —
“चले !”
आन्या ने नजरे उठा कर देखा तो सामने इन्दर खड़ा था , ब्लू जीन्स , वाइट शर्ट एंड हाफ जैकेट , बहुत ही डैशिंग लग रहा था वो , कुछ पल के लिए तो आन्या उसमें खो ही गयी थी।  यही हाल शायद इन्दर का भी था।
इन्दर आन्या की और हाथ बढ़ाते हुए , “चले”
आन्या – कहाँ?
इन्दर – “वही जहाँ कोई आता जाता नहीं —“
आन्या सुनकर हंस पड़ती है।
इन्दर भी उसे हसता देखकर मुस्कुरा देता है।

क्रमशः

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