Pearl In Deep
Passion to write

तेरे जैसा प्यार कहाँ part-12

सूरज ढलने के बाद पहाड़ो का अपना एक अलग ही खुमार होता है।  इतना काफी होता है कभी कभी किसी भी नवयुगल के दिल में नई उमंगो को जगाने के लिए और उनको अंदर तक रोमांचित करने के लिए भी….फिर इन दोनों पर तो इश्क , पहले से ही अपना असर कर चुका था ।।
मौसम काफी रूमानी था , हल्की हल्की रोशनी थी और हल्की हल्की ठंडी हवाएं भी शुरू हो गयी थी।
आन्या एक दम खामोश खड़ी थी , जैसे उस शांत वातावरण में किसी के होने के एहसास को सुनने की कोशिश कर रही हो…उसका दिल तेज तेज धड़क रहा था और अंदर ही अंदर किसी के प्यार की खुशबू महसूस कर रहा था। 
२ पल के लिए इन्दर आन्या को यूँ ही निहारता रहा , आज आन्या बेहद खूबसूरत लग रही थी , उसके मासूम चेहरे पर आते जाते भावो को देखकर इन्दर का मन वैसे ही मचल चुका थे था , दिल में प्यार ही उमंगें लिए फिर वो धीरे धीरे उसकी ओर बढ़ने लगा और उसके करीब पहुंच कर रुक गया और उसे अपलक निहारने लगा। उसका भोला और मासूम सा चेहरा ना जाने कितने ही प्रश्नो से भरा हुआ था मगर फिर भी एक कशिश थी उस चेहरे में…..
तभी ख़ामोशी को तोड़ती आन्या की एक आवाज आई , “रवि…रवि तुम यही हो ना ? मेरा दिल बहुत घबरा रहा है…. तुम इतना शांत क्यों हो ?”
मगर कोई जवाब नहीं आया और एक बार फिर वही ख़ामोशी छा गयी।
तभी एक हवा का झोका आकर आन्या के गालो से टकराया और उसकी सारी लटें उसके चेहरे पर बिखर गयी। 
अभी अभी निकले चाँद की चमकती चांदनी में आन्या का रूप ऐसे दमक रहा था जैसे कोई उजली किरण अभी अभी कही से फूट पड़ी हो। और उसके लहराते बाल बार बार उसके चेहरे पर ऐसे आ जा रहे थे जैसे आकाश में घने काले बादल। 
ये एक एक क्षण इन्दर को मदहोश कर देने के लिए काफी था। उसने ऐसी मासूम खूबसूरती जैसे पहले कभी देखी ही नहीं थी…उसने अपने २-३ कदम और बढ़ाये और उसके थोड़ा और करीब आकर रुक गया….और उसके चेहरे को निहारते हुए धीमे से बुदबुदाया….

“तेरे चेहरे पर शरारत करती तेरी ये जुल्फे ,
तेरे मदहोश करते लबो की थिरकन ,
चैन दिल को नहीं , ना साँसों को मेरी
ये मेरे दिल का सूकून छीनने के लिए काफी है “

और उसने उसके चेहरे से लटो को हटा कर धीरे से उसके कान के पीछे सरका दिया। 
“इन्दर….र..र…”, इन्दर की आवाज और उसका स्पर्श महसूस करते ही आन्या मन ही मन बुदबुदायी….

“तू मेरे दिल में कही , तू मेरी सांसो में बसी
यह डोर टूटेगी कहाँ, जो तेरे दिल से बंधी
थाम लू हाथ तेरा , लगा लू तुझको गले।
बिछा दूँ  सितारे  फलक के , तेरे कदमो के तले “

आन्या इन्दर की आवाज सुनकर इतना बैचैन हो जाती है कि एक झटके से आँखों से पट्टी उतार देती है। दोनों की नजरें एक दूसरे से टकराती है। इन्दर उसकी आँखों में देखते हुए कहता है…

“देख लौट आया हूँ मैं, ए दिलबर  तेरे लिए
अब तो इन साँसों की डोरी, तेरी सांसो से है जुडी।। “

अपने सामने इन्दर को खड़ा देख कर आन्या एक दम से हैरान हो जाती है और घबराकर अपनी आंखें बंद कर लेती है और मन ही मन बुदबुदाती है,  “हे भगवान ये कोई सपना तो नहीं….हाँ ये सपना ही हो सकता है… “, फिर खुद को धीरे से एक चुटकी काटती है ,”आह… नहीं ये सपना नहीं, मतलब….”, बुदबुदाते हुए धीरे धीरे आँखें खोलती है।
इन्दर को अभी भी अपने सामने खड़ा देखकर आन्या इतना भावुक हो जाती है कि चाहकर भी खुद की भावनाओ को रोक नहीं पाती। उसकी आँखों में आसुंओ का सैलाब उमड़ पड़ता है और वो भाग कर इन्दर के सीने से लिपट जाती है और जोर जोर से रोने लगती है ।

“तुम कहाँ चले गए थे इन्दर ? कैसे हो तुम ? तुमने एक बार भी नहीं सोचा के मुझ पर क्या गुजर रही होगी।”, आन्या रोते रोते बस कुछ कुछ बुदबुदाए जा रही थी। ये २ पल उसकी जिंदगी के जैसे सबसे हसीन पल थे… आपका कुछ खोया अचानक से आपको मिल जाये तो कोई भी ऐसे ही रिएक्ट करेगा….
आन्या की एक एक सिसकी इन्दर के दिल पर बहुत भारी पड़ रही थी….आन्या अभी भी उसके सीने से लगी सुबक रही थी जैसे नाह जाने कितना गुबार उसके दिल में भरा हो….और इन्दर प्यार से उसका सर सहला रहा था….आन्या सुबकते सुबकते फिर से बोली….
“ये २ दिन मैंने कैसे काटे है तुम अंदाजा भी नहीं लगा सकते। हर पल मर मर के जी हूँ मैं….अगर तुमको कुछ हो जाता तो मैं क्या करती बोलो , मुझे तो कुछ पता ही नहीं था ….,समझ ही नहीं आ रहा था क्या करू …, किसके पास जाऊ…., किससे पूछू…..। कभी खाई में तुमको पुकारती तो कभी मेरी बेबसी भरे आंसू मेरी आँखों में भर जाते। सब कुछ कितना कठिन था तुम नहीं समझ सकते इन्दर… तुम नहीं समझ सकते….।।। “, कहकर आन्या फिर से जोर जोर से सुबकने लगी….

इन २ दिनों में आन्या ऐसी मनोस्थिति से गुजर चुकी थी कि उसका इस तरह रियेक्ट करना लाजमी था। इन्दर इस बात को बेहतर समझता था। कहा तो वो खुद आन्या को सरप्राइज करने आया था और कहा वो अब उसकी भावनाये जानकर खुद ही सरप्राइज हो गया था… उसे तो उम्मीद ही नहीं थी कि आन्या उसके लिए इतना कुछ महसूस करती है… और आज तो जैसे बिन बदल बरसात ही हो गयी थी…
कुछ देर तो वो शून्य सा यू ही खड़ा रहा… उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या कहे। अपने दिल की खुशी जाहिर करे या आन्या के लिए भावुकता…. वो तो इन सभी पलों को किसी भी तरह बस अपने दिल के अंदर तक जी जाना चाहता था, मगर आन्या का एक एक आंसू भी उसी तरह ही उसके दिल पर चोट दे रहा था। उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि आन्या उसके लिए ऐसे रियेक्ट करेगी।
किसी तरह उसने खुद को संभाला और फिर धीरे से आन्या के बालो पर हाथ फेर कर उसे चुप कराने लगा।

अब तक आन्या भी शायद संभल चुकी थी , उसके आंसू भी थोड़ा थम चुके थे…ये ख्याल आते ही कि वो इन्दर के इतना करीब हैं और उसके सीने से लग कर रो रही हैं …. वो हड़बड़ाकर इन्दर से अलग हो गयी और थोड़ा पीछे हट गयी। अब उसके चेहरे पर संकोच की रेखाएं साफ़ पढ़ी जा सकती थी, और फिर अचानक से ये एहसास होने पर कि वो इन्दर के आगे अपने दिल की भावनाओ को रोक नहीं पाई और सब कुछ ही जता गई, वो थोड़ा सा शरमा जाती है और अपनी नजरें चुराने लगती है।

आन्या को इतना असहज देखकर इन्दर मुस्कुराकर बात बदलते हुए कहता है “हाँ तो मैडम ! कैसा लगा मेरा सरप्राइज…”
आन्या कुछ नहीं बोलती बस मुस्कुरा जाती है , मगर उसके दिल के जज्बात और खुशी, उसके चेहरे पर बड़ी ही आसानी से पढ़े जा सकते थे।

धीरे धीरे जैसे जैसे अँधेरा बढ़ रहा था, हवाएं और ठंडी होती जा रही थी और मौसम और भी आशिकाना।
तभी सारी लाइट्स ऑन हो जाती है और पूरा का पूरा टैरिस जगमगा उठता है।
हर तरफ गुलाब ही गुलाब…..
आन्या अपनी निगाहे चारो ओर घुमाकर देखती है और वहाँ की सजावट को देख कर दंग रह जाती है….चारो ओर बिछी गुलाब की पंखुडिया और उनकी महक उसके दिल को एक अलग ही सुकून दे रही थी। वही बीचो एक गोल सजी हुयी मेज और २ कुर्सियां रखी थी जिसपर पहले से ही २ खूबसूरत शमादान रखे हुए थे जो उसकी खूबसूरती को और भी ज्यादा बढ़ा रहे थे।

इन्दर आन्या को धीरे से उस ओर चलने का इशारा करता है तो आन्या उस ओर बढ़ जाती है , इन्दर कुर्सी थोड़ा पीछे करके उसे बैठने का इशारा करता है और आन्या चारो ओर देखते हुए कुर्सी पर बैठ जाती है और इन्दर उसके सामने वाली कुर्सी पर बैठ जाता है।
ऐसा लग रहा था जैसे आज दोनों प्यार करने वाले एक दूसरे की मौन भाषा को भी बहुत अच्छे से समझने की कोशिश कर रहे हो। 
“तुम आज बेहद खूबसूरत लग रही हो आन्या, बेहद खूबसूरत…. “, उसकी आँखों में निहारते हुए इन्दर ने कहा…
जवाब में आन्या ने अपनी पलके झुका ली और उसके चेहरे पर एक भीनी सी मुस्कान आ गई।
“तुम शरमाते हुए भी सच में और ज्यादा खूबसूरत लग रही हो आन्या….” , इन्दर ने फिर से मुस्कुराकर कहा तो जैसे आन्या के दिल की ख़ुशी गुदगुदा कर उसके अंदर ही सिमट गयी….

“आज ये धरती, ये आसमां, ये चाँद , ये समय, सब ऐसे ही ठहर जाये और मैं बस तुमको , सिर्फ तुमको ऐसे ही निहारता रहूं। “, इन्दर ने आन्या की आँखों में झाकते हुए धीमे से कहा और फिर चाँद की तरफ देख कर धीरे से बोला, “ले देख….मैं जीत गया ना शर्त , कहाँ था ना मैंने कि जिस दिन मेरा चाँद तेरे से रूबरू होगा , उस दिन तू खुद ही फीका पड़ जायेगा , ये देख आज मेरा चाँद खुद मेरे सामने बैठा है…”, कहकर इन्दर धीरे से आन्या का हाथ अपने हाथो में थाम लेता है।
इन्दर का स्पर्श पाते ही आन्या को अंदर तक एक सरसरी सी दौड़ जाती है और वो शरमाकर धीरे से अपना हाथ वापिस खींच लेती है।
“क्या हुआ ?” , इन्दर ने मुस्कुराकर पूछा तो आन्या ने मुस्कुराकर ना में गरदन हिलाई,  “कुछ नहीं…”
फिर आन्या ने बात बदलते हुए धीरे से इन्दर की ओर नजरें उठाते हुए पूछा, “क्या यहाँ पर बस हम दोनों ही है ?”,
“हाँ …. क्यों अकेले डर लग रहा है ?” , इन्दर ने मुस्कुराकर कहा तो आन्या भी मुस्कुरा दी…., “तुमने ये सब कब किया ?”
इन्दर – “आज”
आन्या – “मगर क्यों ?”
इन्दर – “तुम्हारे लिए…”
यह सुनकर आन्या शरमा कर फिर से पलके झुका लेती है।

इन्दर – “इस दिन का मैंने बेसब्री से इंतजार किया है आन्या , मुझे नहीं पता था कि तुम्हारे दिल में क्या है , मगर आज मैं तुमसे अपने दिल की बात कहना  चाहता हूँ , तुम आजाद हो उसका कुछ भी जवाब देने के लिए। तुम जो भी कहोगी मैं खुश होकर उसे स्वीकार कर लूंगा।”

“ऐसा क्या कहना चाहते हो तुम “, आन्या ने सहज होते हुए , भोली सी मुस्कान चेहरे पर लेकर नजरे झुकाये झुकाये बोला, मगर उसके दिल की बढ़ती हुई धड़कने,  उसके अंदर की घबराहट और बैचनी को खुद उससे साफ़ साफ़ बयान कर रही थी। शायद उसका मन समझ गया था कि इन्दर उसे क्या बोलने वाला है। 
इन्दर अपनी जगह पर खड़ा हो गया और फिर उसने एक इशारा किया तो सारी लाइट्स बंद हो गई , अब केवल शमादान की हल्की हल्की रोशनी ही उस मुलाक़ात को खूबसूरत बनाने के लिए काफी लग रही थी। पीछे हल्का हल्का बैकग्राउंड म्यूजिक चल रहा था और उस खूबसूरत सी रोशनी में वो दोनों ही बेहद खूबसूरत लग रहे थे….
इन्दर आन्या के पास जाकर खड़ा हो गया और उसने अपना हाथ उसके आगे किया तो आन्या धीरे से इन्दर का हाथ पकड़ कर खड़ी हो गयी ….फिर  इन्दर उसका हाथ अपने हाथो में पकडे पकडे ही उसकी आँखों में देख़ते हुए गुनगुनाया…

“मेरी चाह जानकर भी क्यों अनजान बन जाते हो? ,
समझते हो सबकुछ , तो क्यों नहीं आँखों से समझाते हो
ना चाहकर भी तेरे इश्क़ के समुन्दर में डूब चुके है हम
ये जानते हो फिर भी क्यों बेखबर बन जाते हो ?”

यह सुनकर आन्या के होंठो पर अनायास ही एक मुस्कराहट उभर आई ।।। आन्या को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि इन्दर इस कदर रोमांटिक भी हो सकता है , कितना कुछ कर डाला था उसने आन्या के लिए…..
अचानक इन्दर अपने एक घुटने को जमीन पर टिकाते हुए नीचे बैठ गया और उसके हाथ पर धीरे से किस कर दिया……इन्दर के होंठो का स्पर्श पाकर आन्या की आँखें अपने आप बंद हो गयी।।।  दोनों की ही धड़कने बहुत तेज तेज ऐसे धड़क रही थी, मानो अभी कोई तूफ़ान आ जायेगा।

कुछ पल माहौल में शांति छायी रही , आन्या ने खुद को सँभालते हुए धीरे धीरे आँखें खोली तो इन्दर को अपने बेहद करीब पाकर उसकी साँसे और तेज तेज चलने लगी, फिर दोनों की आँखें एक दूसरे से टकराई और इन्दर अपने चेहरे को उसके और करीब ले गया तो उसने घबराकर अपना चेहरा घुमा लिया। इन्दर के होंठ उसके कानो के बेहद करीब थे…. उसने धीरे से कहा  , “आई –इ–इ–इ  लव यू सो मच–च –च  आन्या , क्या मैं तुम्हारा प्यार बनकर तुम्हारी जिंदगी में शामिल हो सकता हूँ ?”

“मेरे दिल ने चुन लिया है तुमको
अब तो बस तेरे इकरार की तमन्ना है।। “

आन्या तो यह सब सुनकर जैसे मदहोश ही हो गई और उसने खुद को सँभालने के लिए अपने दोनों हाथो से इन्दर के कंधो को थाम लिया….तो इन्दर ने भी उसकी कमर में हाथ डालकर उसे हल्का सा अपनी और खींच लिया। इस पर आन्या ने कोई विरोध नहीं किया और बस शरमा गई।

“दिल की गहराइयो से चाहने लगा हूँ मैं तुमको आन्या  , सोते जागते बस तुम ही मेरे खयालो में रहने लगी हो। मैं इतना तो जान गया हूँ कि शायद तुम भी मेरे लिए ऐसा ही कुछ महसूस करती हो।  पर आज उस एहसास को लफ्जो की जरुरत है स्वीटहार्ट। क्या तुम कुछ नहीं कहोगी ?”,  इन्दर ने आन्या के चेहरे को अपनी अंगुली से थोड़ा सा ऊपर उठाकर कहा।

इन्दर की आंखें आन्या को इस तरह निहार रही थी मानो उससे तुरंत ही जवाब की प्रतीक्षा हो उनको।
आन्या की आँखें अभी भी शर्म से झुकी हुई थी , उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो अपने दिल का इकरार कैसे करे। जिन जज्बातो को जाहिर करने की बात इन्दर उससे कर रहा था वो तो उसे उसी दिन महसूस हो गए थे जब इन्दर उससे कुछ पल के लिए दूर हुआ था। बस अब तो उनको लफ्जो में उतरना ही बाकि रह गया था। ये सोचते ही उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट आ गई….
उसे मुस्कुराता देखकर इन्दर उसे अपने और करीब खींचते हुए बोला, “बहुत मुस्कुरा रही हो मुझे तड़पा कर , हम्म “
उसकी गरम साँसे आन्या के गलो से टकराई तो वो अंदर कर सिहिर गई , वो खुद को इन्दर की गिरफ्त से छुड़ाने की कोशिश करने लगी मगर छुड़ा नहीं पाई और फिर शरमाकर उसके सीने से लग गई और धीरे से बुदबुदाई , “अभी भी कुछ कहने की जरुरत है क्या , क्या तुम अभी भी मेरे दिल की बात नहीं समझे इन्दर। आई लव यू टू इन्दर…. “

“क्या कहाँ? एक बार फिर से कहो ना “, इन्दर आन्या को बाहों में भरकर बोला तो आन्या ने शरमा कर अपना मुँह उसके सीने में छुपा लिया।
इन्दर (हसकर) – “हाय मेरी शर्मीली, और कितना शरमाओगी अब “, कहकर इन्दर ने उसे अपनी बाहों में ही कस लिया ।
फिर कुछ देर तक दोनों ऐसे ही म्यूजिक की धुन पर हौले हौले थिरकते रहे….
“वाओ कितने खूबसूरत पल है ये…”, इन्दर आन्या से बोला, “तुम कुछ बोलोगी नहीं आन्या”
“क्या ? “, आन्या धीरे से मुस्कुराई
“कुछ भी……वैसे तुम खुश तो हो ना” , इन्दर ने पूछा
“हम्म “, आन्या ने हलके से सर हिला के उत्तर दिया
“मैं भी , बहुत बहुत ज्यादा खुश”, इन्दर ने एक्ससाईटेड होकर आन्या को बाहो में भीचते हुए कहाँ।

तभी एक स्पोट लाइट उन दोनों के ऊपर पड़ी और दोनों प्यार की मदहोशी से निकल कर हक़ीक़त की जमी पर आ गए।  एक दूसरे से नजर मिलते ही आन्या हड़बड़ाकर इन्दर से अलग हो गई और अपनी सीट पर जाकर बैठ गई और इन्दर अपनी।
दोनों ही खामोश थे और चुपके चुपके एक दूसरे को देख तो रहे थे मगर नजरें नहीं मिला पा रहे थे। दोनों के मन की बैचनी उनकी होंठों पर दबी मुस्कान में साफ़ दिख रही थी। 
तभी वेटर आकर बोला – “सर , क्या लेंगे आप ?”
इन्दर आन्या की तरफ देख कर मुस्कुराते हुए  बोला – “खाने में क्या लोगी आन्या ?” तो आन्या मेनू उलट पलट कर देखने लगी मगर उसका दिमाग तो जैसे कही और ही था।  वो अपने एक हाथ से अपने दूसरे हाथ की अंगुलियों को दबाये जा रही थी और उसकी निगाहे अभी तक टेबल की ओर ही थी।
“कुछ भी माँगा लो इन्दर “, उसने बात को टालने के इरादे से कहा। उसका दिमाग तो प्यार की मदहोशी से पहले ही शून्य हो चुका था….और अब तो उसे बार बार बस अभी कुछ देर पहले की बातें ही रह रह कर याद आ रही थी और शरमाहट के कारण उसके गाल अभी भी लाल दिखाई दे रहे थे।
आन्या की ऐसी हालत देखकर इन्दर मन ही मन मुस्कुरा रहा था और फिर उसने खुद से ही कुछ आर्डर कर दिया ।
थोड़ी ही देर में उनकी मेज लजीज पकवानो से सुसज्जित हो गई…. सब कुछ अपनी पसंद का देख आन्या आश्चर्य और ख़ुशी से इन्दर को देखकर बोली, “अरे सब कुछ मेरा फेवरेट….आपको कैसे पता चला ?”
“बस लगा लिया पता…” , कहकर इन्दर मुस्कुराया तो आन्या भी मुस्कुराती हुई बोली , “मुझे पता है किसने बताया….मौसी ने ना…” तो इन्दर ने भी मुस्कुराकर हाँ में पलके झपका दी…♥

अभी दोनों खाना खा ही रहे थे कि तभी , “टन–न–न –टना–ना–ना—-न “, रवि कहता हुआ अंदर एंटर हुआ ।
आन्या और इन्दर दोनों ने उस साइड देखा।
“क्या हम लोग भी आपकी महफ़िल में शामिल हो सकते है ? “, कहते हुए इन्दर के दोस्तों ने वहाँ एंटर किया। आन्या की मौसी और ध्रुव भी साथ ही थे।

“अरे हाँ हाँ क्यों नहीं मेरे यार , आजा , मैंने तो पहले से ही तेरे लिए सब कुछ आर्डर किया हुआ था, देख देख”, इन्दर रवि की तरफ देखकर खिजियाते हुए बोला….

“हे हे हे ! बहुत बढ़िया भाई, तू कित्ता ख्याल रखता है मेरा…”, ये कहकर हसते हुए रवि एक कुर्सी उठाकर ले आया और  इन्दर और आन्या के बीच डालकर उस पर पसर गया तो इन्दर उसे घूरने लगा।
रवि उसको घूरता देख कर सीधा बैठ गया और मन ही मन बोला, “क्या भाई , ऐसे क्यों घूर रहा है मुझे…. देख कितना डर गया मैं, है है है….”

तभी आन्या की मौसी , आन्या के पास आके खड़ी हो गई , “कैसी है आन्या ? कैसा लगा सरप्राइज ?”, तो आन्या शरमाकर चुपचाप मौसी के गले लग गई और धीरे से बुदबुदाई , “बहुत अच्छा लगा मौसी “

“थैंक यू मौसी , मुझपर विश्वास करने और मुझे आन्या से मिलवाने के लिए….अगर आज आप नहीं होती तो शायद…..”, इन्दर मौसी की तरफ देख कर बोला तो मौसी बीच में ही बोल पड़ी , “अरे! कोई थैंक यू नहीं….यार , तुम दोनों बस खुश रहो…”, कहकर मौसी आन्या के सर पर हाथ फेरती है।

“आइये बैठिये ना मौसी “, इन्दर ने अपनी सीट से उठकर मौसी को बैठने के लिए बोला।
“नहीं इन्दर , अब हमे जाना होगा। बहुत लेट हो गया है , आन्या के मौसाजी भी आ गए होंगे।  हम फिर कभी बैठेंगे साथ।  अब तो मिलना जुलना चलता ही रहेगा ? क्यों है ना आन्या ?”, मौसी ने मुस्कुराकर आन्या को छेड़ा तो आन्या उत्तर में बस शरमा गई।

“पर मौसी डिनर तो आपने किया ही नहीं ?”, इन्दर मौसी से अनुरोध करते हुए बोला।
“घर जाकर , इन्दर , अभी ज्यादा देर रुकना लाजमी नहीं , चलो आन्या “, कहकर मौसी आन्या का हाथ पकड़ कर वहाँ से जाने के लिए मुड़ी तो आन्या ने पलट कर एक बार इन्दर को देखा और फिर मौसी के साथ बाहर निकल गई।
इन्दर आन्या को जाते हुए तब तक देखता रहा जब तक कि वो उसकी आँखों से ओझल नहीं हो गयी।

आन्या के जाते ही सारे इन्दर पर टूट पड़े और उसकी टांग खिचाई करने लगे।  , “अरे चल बस अब धरती पर आ जा मेरे मजनू की औलाद, और ये बता आखिर हुआ क्या क्या , हम्म  “, रवि इन्दर के कंधे पर हाथ टिका कर दाँत दिखाते हुए बोला….
“आजा मेरी जान तुझे करके बताता हूँ, तुझे बहुत दिलचस्पी हो रही है जानने की…हम्म “, कहकर इन्दर ने रवि को अपनी और खींचा तो रवि चिल्लाया , “अरे बस बस , मुझे नहीं जानना कुछ भी , हद हो गयी यार…मतलब कुछ भी करोगे….”, ये कहकर रवि घबराकर खुद ही पीछे हट गया।
यह देखकर सारे के सारे पहले रवि को देखते है फिर जोर जोर से हसने लग जाते है।
काफी देर तक हसीं मजाक और पार्टी चलती रहती है
फिर वो लोग भी होटल के लिए निकल जाते है।
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क्रमशः

रूचि जैन

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