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एक गीत सावन की फुहार के नाम

एक गीत सावन की फुहार के नाम ……

मौसम ने ली अंगड़ाई , सावन की बदरी छाई 
जियरा हौले हौले गाये , धुन कोई मतवाली

वो टप टप  करती बूंदे 
मेरे तन को जब छूती है 
सारे बचपन की यादें मेरे मन को छू लेती है 
छप छप करती, बच्चो की वो टुकड़ी 
कागज की कश्ती बनाये 
जियरा हौले हौले गाये , धुन कोई मतवाली

कॉलेज की यादें दिल में , मीठे से तीर चलाये 
कॉलेज कैंटीन में बैठ के हम चाय पकोड़ा खाये 
छाते को छोड़ा हॉस्टल , 
बदरी में भीगे छुप छुप 
जियरा हौले हौले गाये , धुन कोई मतवाली

वो पहला सावन मेरा 
जब तेरे प्यार के रंग में भीगा 
हाथो में तेरे नाम की मेहँदी ,
रंग प्यार का चढ़ा नवीना 
हाथो में हाथ वो थामे ,
हाले दिल की कहे कहानी 
जियरा हौले हौले गाये , धुन कोई मतवाली

बारिश की रिमझिम बरसे 
मौसम ने ली अंगड़ाई 
जियरा हौले हौले गाये , धुन कोई मतवाली

– रूचि जैन 

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